DAILY BALOD NEWS

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“बालोद में राशन घोटाले की बू: सरकारी चावल बन रहा मुनाफे का सौदा, जांच पर उठे सवाल”

बालोद। जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले सस्ते राशन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि गरीबों को मिलने वाला सरकारी चावल अब खुले बाजार में मुनाफे का जरिया बनता जा रहा है।


🔎 खुलेआम बिक रहा सरकारी चावल

मिली जानकारी के अनुसार, कई जगहों पर हितग्राही अपने हिस्से का चावल उपयोग करने के बजाय स्थानीय बाजार में 25 से 30 रुपए प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं। इसके बाद यही चावल बिचौलियों के माध्यम से राइस मिलों तक पहुंचाया जा रहा है।


🏭 मिलों में प्रोसेसिंग, फिर महंगे दामों में बिक्री

राइस मिलों में इस चावल को प्रोसेस कर खंडा और कंकी के रूप में तैयार किया जाता है और फिर बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों को भारी मुनाफा होने की बात सामने आ रही है।


📦 तीन महीने का राशन, बढ़ा खेल

इस बार हितग्राहियों को एक साथ तीन महीने का राशन मिलने के कारण बाजार में बड़ी मात्रा में चावल की खरीदी-बिक्री हो रही है, जिससे यह अवैध गतिविधि और तेज हो गई है।


⚠️ किराना दुकानों में नहीं होती जांच, बढ़ रहा खेल

स्थानीय लोगों का कहना है कि किराना दुकानों में खाद्य विभाग की नियमित जांच नहीं होने के कारण खरीदार और बिचौलिए इसका फायदा उठा रहे हैं। खुलेआम सरकारी चावल की खरीद-बिक्री हो रही है, लेकिन निगरानी के अभाव में कार्रवाई नहीं हो पा रही है।


🍚 गुणवत्ता पर भी सवाल, मजबूरी में बेच रहे लोग

कई महिलाओं ने बताया कि सरकारी चावल की गुणवत्ता अच्छी नहीं होती और पकाने में भी दिक्कत आती है। ऐसे में वे इसे बेचकर बेहतर गुणवत्ता का चावल खरीदने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि सरकार को मुफ्त राशन के साथ गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए।


🗣️ चंद्रभान साहू ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग

इस मामले में संजारी बालोद के छाया विधायक चंद्रभान साहू ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए काला बाजारी पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह गरीबों के हक पर सीधा हमला है।


📢 जांच के निर्देश, कार्रवाई की चेतावनी

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच के निर्देश देने की बात कही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस अवैध गतिविधि में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


👉 यह पूरा मामला दर्शाता है कि PDS व्यवस्था में कड़ी निगरानी, नियमित जांच और गुणवत्ता सुधार बेहद जरूरी है, ताकि गरीबों के अधिकार सुरक्षित रह सकें और योजनाओं का सही लाभ मिल सके।

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