“तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ नाचा महोत्सव का आगाज: लोक कलाकारों ने सहेजी संस्कृति की विरासत”



बालोद। जिले के ग्राम निपानी में छत्तीसगढ़ नाचा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। यह त्रिवसीय आयोजन छत्तीसगढ़ नाचा लोक कलाकार संस्था द्वारा किया जा रहा है, जिसमें प्रदेशभर के लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।


🎭 समृद्ध रही है नाचा की परंपरा

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि जिला सरपंच संघ बालोद के अध्यक्ष क्रांति भूषण साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नाचा कला का समृद्ध इतिहास रहा है। उन्होंने बताया कि पहले “खड़े साज” के माध्यम से नाचा प्रस्तुत किया जाता था, जहां कलाकार खड़े होकर ही गायन-वादन करते थे। उस समय बिजली की सुविधा नहीं होने के कारण मशालों की रोशनी में कार्यक्रम आयोजित होते थे।


🌟 कला के पुरोधाओं को किया याद

उन्होंने आगे कहा कि समय के साथ मंचीय व्यवस्था विकसित हुई और मदन मदराजी, दाऊ रामचंद्र देशमुख और खुमान साव जैसे महान कलाकारों ने इस कला को आगे बढ़ाने में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्हीं के प्रयासों का परिणाम है कि आज छत्तीसगढ़ में हजारों कलाकार इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।


⚠️ कलाकारों की स्थिति पर चिंता

मुख्य अतिथि ने यह भी कहा कि आज भी कई लोक कलाकार आर्थिक अभाव से जूझ रहे हैं, जिन्हें शासन स्तर पर सहयोग की आवश्यकता है। यदि समय रहते इन्हें समर्थन नहीं मिला, तो यह अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर कमजोर हो सकती है।


🗣️ अन्य अतिथियों ने भी रखे विचार

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बालोद ब्लॉक सरपंच संघ अध्यक्ष कृष्णा साहू ने भी नाचा कला के संरक्षण पर जोर दिया।
विशेष अतिथि के रूप में दिलीप कुमार डहरे (सरपंच निपानी), कुमुदिनी साहू (सरपंच बेलोदी) और सीमा साहू (सरपंच सोहपुर) उपस्थित रहे।


इंद्रकुमार धनकर भरदा कला से भी पहुंचे थे।

👥 बड़ी संख्या में जुटे कलाकार और ग्रामीण

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ नाचा लोक कलाकार संस्था के अध्यक्ष चक्रधारी जी, पदाधिकारी, जिलेभर के कलाकार और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए। आयोजन के पहले दिन ही दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला।


🎶 संस्कृति को बचाने का संकल्प

यह महोत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक मजबूत प्रयास है। कलाकारों का समर्पण यह दर्शाता है कि संसाधनों की कमी के बावजूद वे अपनी परंपरा को जीवित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

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