बालोद | 1 मई 2026। माध्यमिक शिक्षा मंडल के हालिया परीक्षा परिणामों में जिले का प्रदर्शन निराशाजनक रहने के बाद अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी (आप) ने जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर शासन-प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
‘टॉप-10 में जगह नहीं, व्यवस्था की बड़ी विफलता’
आप के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश संयुक्त सचिव दीपक आरदे ने बयान जारी कर कहा कि इस वर्ष 10वीं और 12वीं की प्रावीण्य सूची (टॉप-10) में जिले के एक भी छात्र का स्थान नहीं बनना केवल आंकड़ों की कमी नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की असफलता है।
उन्होंने बताया कि 10वीं में 2520 और 12वीं में 819 विद्यार्थियों का अनुत्तीर्ण होना बेहद चिंताजनक है, जो शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
पत्रकारों के दमन का आरोप
दीपक आरदे ने आरोप लगाया कि जिले के पत्रकार लगातार शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर कर रहे थे, लेकिन सुधार करने के बजाय प्रशासन ने उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया।
“पत्रकारों ने शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर किया, लेकिन शासन ने सुधार के बजाय उनकी आवाज दबाने की कोशिश की। आज उसी का परिणाम सामने है।”
शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और प्रशासनिक उदासीनता लंबे समय से बनी हुई है। यदि समय रहते सुधार किया जाता तो आज यह स्थिति नहीं बनती।
कठोर कार्रवाई की मांग
आप ने मांग की है कि केवल समीक्षा बैठकों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई गई है।
जन-आंदोलन की चेतावनी
दीपक आरदे ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ और पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई बंद नहीं की गई, तो पार्टी इस मुद्दे को लेकर जन-आंदोलन करेगी।
यह मामला अब केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जिले की शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे बड़े मुद्दों को भी केंद्र में ला रहा है।
