“पालिका के 16 तालाबों में सिर्फ गंगासागर ही याद है?”—रिटिया और काशी बन तालाब की बदहाली पर उठी आवाज



बालोद। नगर पालिका क्षेत्र बालोद में विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर असमानता के आरोप सामने आए हैं। जहां एक ओर गंगासागर तालाब पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर सौंदर्यीकरण और विकास कार्य किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वार्ड क्रमांक 6 व 7 के रिटिया तालाब और काशी बन तालाब वर्षों से उपेक्षा का शिकार बने हुए हैं। इस मुद्दे को लेकर जनसेवक उमेश कुमार सेन ने प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की है।

“सिर्फ एक तालाब ही क्यों?”—जनसेवक का सवाल

उमेश कुमार सेन ने कहा कि
“बालोद शहर केवल एक तालाब का नाम नहीं है, बल्कि यहां कई ऐतिहासिक और जनउपयोगी तालाब मौजूद हैं। फिर विकास सिर्फ गंगासागर तक ही सीमित क्यों है?”
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एक तालाब पर करोड़ों खर्च किए जा सकते हैं, तो अन्य तालाबों को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है।

रिटिया और काशी बन तालाब की बदहाल स्थिति

उन्होंने बताया कि दोनों तालाबों की वर्षों से सफाई नहीं हुई है, जिससे—

  • जलकुंभी और कचरे का जमाव
  • गंदगी और कीचड़
  • पानी का काला पड़ना
  • बदबू फैलना

जैसी समस्याएं उत्पन्न हो चुकी हैं। इसके बावजूद स्थानीय लोग मजबूरी में इसी पानी का उपयोग कर रहे हैं, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

16 तालाब, लेकिन विकास असमान

जनसेवक ने बताया कि नगर पालिका बालोद में कुल 16 तालाब दर्ज हैं, जो शहर की जल धरोहर और पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
लेकिन सवाल यह है कि—
इनमें से कितने तालाबों का वास्तविक संरक्षण हुआ? कितनों की सफाई और गहरीकरण हुआ?

कभी पहचान थे ये तालाब

उमेश सेन ने कहा कि
रिटिया और काशी बन तालाब कभी क्षेत्र की पहचान हुआ करते थे, जहां—

  • जल संरक्षण होता था
  • पशु-पक्षियों को पानी मिलता था
  • सामाजिक व धार्मिक गतिविधियां होती थीं

लेकिन अब प्रशासनिक लापरवाही के कारण ये तालाब धीरे-धीरे समाप्ति की कगार पर पहुंच रहे हैं।

प्रशासन से की मांग

उन्होंने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि—

  • दोनों तालाबों का तत्काल सर्वे कराया जाए
  • नियमित सफाई और गहरीकरण किया जाए
  • सौंदर्यीकरण की योजना बनाई जाए
  • संरक्षण के लिए अलग से बजट स्वीकृत किया जाए
  • सभी वार्डों में समान विकास नीति लागू की जाए

“तालाब बचेंगे तो भविष्य बचेगा”

उमेश कुमार सेन ने कहा कि
“तालाब केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और भविष्य की धरोहर हैं। यदि इन्हें नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इसे माफ नहीं करेंगी।”

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नगर पालिका सभी 16 तालाबों को समान महत्व देगी, या विकास सिर्फ चुनिंदा स्थानों तक ही सीमित रहेगा?

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