बालोद, 29 अप्रैल 2026। करहीभदर क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं को लेकर जनपद सदस्य लोकेश डड़सेना ने बड़ा बयान देते हुए भाजपा सरकार को सीधी चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि “5 साल कांग्रेस सरकार को भी देख लिया, क्षेत्र को कुछ नहीं मिला। अब भाजपा सत्ता में है, अगर करहीभदर में कॉलेज, थाना और उपतहसील खोलने का ऐलान कर दे, तो मैं उसी दिन अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा।”
“मुझे कुर्सी नहीं, क्षेत्र का हक चाहिए”
डड़सेना ने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य पद पर बने रहना नहीं, बल्कि करहीभदर बेल्ट को उसका हक दिलाना है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ठोस निर्णय लेती है, तो वे सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने को तैयार हैं।
कॉलेज न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
उन्होंने बताया कि बी. जामगांव मटिया, करकाभाट, लिमोरा, अमोरा, मुल्लेगुड़ा, परेगुड़ा, कन्नेवाड़ा, हथौद, मुजगहन सहित 20 से अधिक गांवों के छात्रों को 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ती है।
कॉलेज के लिए 25-30 किमी दूर बालोद या धमतरी जाना पड़ता है, जहां न पर्याप्त बस सुविधा है और न ही गरीब परिवारों के लिए खर्च उठाना आसान। इससे खासकर बेटियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
थाना दूर, न्याय में देरी
डड़सेना ने कहा कि थाना दूर होने के कारण कारकभाट से लिमोरा तक के ग्रामीणों को छोटी-छोटी शिकायतों के लिए भी बालोद या देवरी जाना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि रात में घटना होने पर पुलिस की पहुंच सुबह तक होती है, जिससे लोगों में असुरक्षा का माहौल बना रहता है।
उपतहसील नहीं, तो हर काम में परेशानी
उन्होंने बताया कि उपतहसील न होने से जमीन संबंधी कार्य, नामांतरण, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र के लिए ग्रामीणों को बार-बार बालोद जाना पड़ता है।
एक कागज के लिए कई दिन और हजारों रुपये खर्च करना पड़ता है, जिससे बुजुर्ग और किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं।
दोनों सरकारों पर साधा निशाना
डड़सेना ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि
“कांग्रेस ने 5 साल सिर्फ वादे किए, काम कुछ नहीं हुआ। भाजपा से उम्मीद थी, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है। चुनाव के समय नेता हर गांव में आते हैं, लेकिन बाद में दिखाई नहीं देते।”
“घोषणा करो, मैं इस्तीफा दूंगा”
उन्होंने दो टूक कहा—
“सरकार अगर करहीभदर में कॉलेज, थाना और उपतहसील खोलने का नोटिफिकेशन जारी करे, तो मैं तुरंत प्रेस बुलाकर इस्तीफा दे दूंगा। लेकिन अगर सिर्फ आश्वासन मिला, तो 2028 में जनता दोनों दलों से हिसाब लेगी।”
क्षेत्र में तेज हुई चर्चा
डड़सेना के इस बयान के बाद बी. जामगांव मटिया से अमोरा तक पूरे क्षेत्र में सियासी हलचल तेज हो गई है। लोग इसे एक बड़ा राजनीतिक दांव मान रहे हैं और चर्चा कर रहे हैं कि क्या सरकार इस चुनौती को स्वीकार करेगी।
अब नजर इस बात पर है कि सरकार करहीभदर क्षेत्र की इन मांगों पर क्या फैसला लेती है।
