बालोद। बालोद ब्लॉक के ग्राम सांकरा ज. आंगन बाड़ी केंद्र क्र.1 में फाइलेरिया की रोकथाम हेतु दवा खिलाया गया। निवर्तमान सरपंच वारूणी शिवेंद्र देशमुख और नवनिर्वाचित सरपंच लता नारद चुरेन्द्र ग्राम पटेल योगेन्द्र देशमुख,आंगन बाड़ी कार्यकर्ता गुलापी बघेल, सहायिका और अन्य उपस्थित रहे। इस दौरान बच्चों ,पालकों सहित ग्रामीणों को फाइलेरिया से संबंधित जानकारी भी दी गई। निवर्तमान सरपंच वारुणी शिवेंद्र देशमुख ने बताया कि फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। इसके फैलने के विभिन्न स्रोत हो सकते हैं। जैसे कहीं पर रुके हुए पानी में मच्छर के पनपना, संक्रमित व्यक्ति को काटकर मच्छर संक्रमित हो जाते हैं। संक्रमित मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटकर संक्रमित कर देते हैं। संक्रमित व्यक्तियों को हाथी पांव व हाइड्रोसिल का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि हर साल फाइलेरिया प्रभावित क्षेत्र में एमडीए कार्यक्रम के द्वारा फाइलेरिया का रोकथाम की जाती है। जिसके तहत लोगों को जागरूक किया जाता है कि वह मच्छरदानी का प्रयोग करे। अभियान में फाइलेरिया से बचाव की दवाएं खिलाई जाती है और आसपास सफाई रखने के लिए प्रेरित किया जाता है। एमडीए की दवा सरकार द्वारा साल में एक बार घर-घर मुफ्त दी जाती है। इसी तरह डीईसी की गोली खाली पेट नहीं खाना है और एल्बेंडाजोल की गोली चबाकर खाना है। दवा लेने वाले को स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही दवा खाना जरूरी है। किसी परेशानी की अवस्था में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। मरते हुए परजीवियों के प्रतिक्रिया स्वरूप कभी-कभी सर दर्द, शरीर में दर्द, बुखार, उल्टी तथा बदन पर चकत्ते एवं खुजली जैसी मामूली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती है। इसलिए इस पर किसी तरह की घबराने की जरूरत नहीं है। इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं है, ना कोई खतरा है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया के लक्षणों की अगर बात करें तो सामान्य कोई लक्षण इसमें विशेष रूप से दिखाई नहीं देते हैं। पैरों और हाथों में सूजन होना यानि हाथी पांव और हाइड्रोसील यानी अंडकोषों का सूजन, बुखार, हाथ पांव एवं जननांग में तथा उसके आसपास दर्द या सूजन होना, यह इनके प्राथमिक लक्षण हो सकते हैं।
आंगनबाड़ी केंद्र सांकरा ज में बच्चों को खिलाई गई फाइलेरिया रोधी दवा
