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बच्चों को संस्कारवान बनाने बाल संस्कार शाला आचार्य प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न

बालोद| गायत्री शक्तिपीठ दल्लीराजहरा में एक दिवसीय बाल संस्कार शाला आचार्य प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत माँ गायत्री की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन के साथ हुई,
कार्यक्रम का संचालन पी एल सोनवानी ब्लॉक समन्वयक डौंडी ने किया। पी एल सोनवानी जी के कहा कि
गायत्री परिवार का गुरुमंत्र – ‘युग निर्माण कैसे होगा… व्यक्ति के निर्माण से’ और ‘व्यक्ति निर्माण कैसे होगा… बाल संस्कार शाला से ।’ जिस तरह कुम्हार गीली मिट्टी को मनचाहे आकार में ढालकर विभिन्न पात्रों का रुप दे देता है, ठीक वैसे ही बच्चों का मन-मस्तिष्क कोमल होता है। उन्हें घर-परिवार एवं आसपास में जो वातावरण मिलता है उसी में ढल जाता है। वर्तमान समय में आसपास का वातावरण कैसा है बताने की जरुरत नहीं । दूसरी ओर सभी अभिभावक अपने बच्चे को बेहतर से बेहतर बनाना चाहते हैं। परन्तु सवाल यह है कि ये बेहतर बनेंगे कैसे ? और उन्हें बनाएगा कौन ? इस विषय पर गहन चिन्तन करते हुए परम् पूज्य गुरुदेव ने बाल संस्कार शाला चलाने हेतु गायत्री परिवार के परिजनों को प्रेरित किया । गुरुदेव की प्रेरणा को छत्तीसगढ़ के सपूतों ने धरातल में उतारते हुए बाल संस्कार शाला का शुभारम्भ किया। आचार्य प्रशिक्षक के रूप में दिलीप कुमार निर्मलकर जिला संयोजक युवा प्रकोष्ठ बालोद, रोहित साहू ब्लॉक सचिव गुरुर एवम श्रीमती रेणुका गंजीर नारी जागरण जिला सदस्य उपस्थित थे।श्री निर्मलकर जी प्रशिक्षण में बताया कि बाल संस्कार शाला प्रत्येक सप्ताह शनिवार या रविवार 2घण्टे को संचालित होता हैं। जिसमें चार कालखण्ड होता है, प्रथम द्वितीय एवम तृतीय कालखंड 25-25 मिनट का होता है जिसमे प्रार्थना,वन्दना, जपध्यान एवं धरती माता को प्रणाम करना ,सदवाक्य चिंतन मनन, प्रेरणा दायक कहानी, स्वस्थ रहने की कला, जीवन जीने की कला, महापुरुषों के प्रेरक प्रसंग, एवं जन्मदिन कैसे मनाये आदि सिखाया जाता है। चतुर्थ कालखंड में योगाभ्यास, आसान,प्राणायाम, जयंती पर्व संदेश, मनोरंजन खेल सिखाया जाता है। उक्त सभी क्रियाकलाप को प्रदर्शन करके बताया गया। प्रशिक्षण लेने के लिये डौंडी ब्लाक के विभिन्न गांवों से लगभग 55 युवा भाई बहन उपस्थित थे । उक्त युवा भाई बहनों ने अपने अपने गांव में निःशुल्क बाल संस्कार शाला खोलने का संकल्प लिया। गायत्री परिवार सप्तक्रांति आंदोलन चलाती है जिसमे साधना, नारी जागरण, स्वावलंबन, पर्यावरण संवर्धन, नशा मुक्ति आंदोलन, एवम शिक्षा आंदोलन शामिल है।निर्मलकर जी ने बताया कि बाल संस्कार शाला का संचालन अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन से होता है, एवं पूर्णतः निःशुल्क रहता है। जिसमें पांचवी से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे आ सकते है। शांतिपाठ के साथ बाल संस्कार शाला आचार्य प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न हुआ ।
उक्त प्रशिक्षण में गायत्री शक्तिपीठ दल्लीराजहरा के मुख्य ट्रस्टी श्री एस के कलिहारी, प्रबंध ट्रस्टी आर आर वर्मा, बंसी लाल रावटे ,पीताम्बर साहू, मंदिर के पुजारी देवप्रसाद आर्य, हिमांशु साहू, एवम दल्लीराजहरा के परिजन श्रीमती सविता वर्मा, श्रीमती अर्चना देशमुख, वीणा साहू, ऐश्वर्य साहू , धर्मेंद्र वर्मा, एन के पिस्दा उपस्थित थे।

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