नहीं बना स्थाई स्टाल, संचालक समूह ने खड़े किए हाथ, मार्च से बिक्री बंद, रेलवे के अफसर नहीं दे रहे ध्यान
रेखा साहू, सिटी रिपोर्टर बालोद। रेल मंत्रालय ने भारत सरकार की वोकल फॉर लोकल विजन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्वदेशी उत्पादों के लिए बाजार प्रदान करने और समाज के वंचित वर्गों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर जुटाने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने वन स्टेशन वन प्रोडक्ट (ओ एस ओ पी) योजना शुरू की थी।

इस योजना के तहत रेलवे स्टेशनों पर ओएस ओपी. केंद्र को स्वदेशी स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने बेचने और उच्च दृश्यता प्रदान करने के लिए आवंटित किया जाता है।

लेकिन यह योजना बालोद जिला मुख्यालय की रेलवे स्टेशन में दम तोड़ती नजर आ रही है। ऐसा नहीं है कि इसकी शुरुआत यहां नहीं हुई थी। पिछले साल ही 27 जून 2022 को बालोद रेलवे स्टेशन और दल्ली राजहरा में एक साथ इस योजना के तहत संबंधित स्व सहायता समूह की महिलाओं को स्थानीय उत्पादों का स्टाल लगाने की अनुमति दी गई थी। प्रारंभ में अस्थाई स्टॉल समूह द्वारा खुद से ही टेबल कुर्सी का इंतजाम कर लगाया जाता था। लेकिन स्थाई स्टॉल रेलवे द्वारा बनाया जाना था। जो दल्लीराजहरा में तो बन गया लेकिन इस मामले में बालोद पिछड़ गया और यही वजह है कि अब तक स्टाल नहीं बन पाने के कारण संबंधित समूह ने इस योजना के तहत स्टॉल लगाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। 24 मार्च 2023 से यहां स्टॉल लगना बंद हो चुका है। स्टॉल लगाने वाली महिलाओं का कहना है कि अपने खर्चे से हम यहां स्टॉल लगाते थे। सामान लाने ले जाने और सुरक्षा और फर्नीचर में काफी दिक्कत होती थी। तो उस पर बंदरों के उत्पात से भी बहुत परेशान थे। रेलवे के अफसरों को बार-बार बताया जाता था कि स्टॉल बना कर दे। लेकिन वह टालमटोल करते रहते थे। जिसके चलते अब हमने ही स्टॉल लगाने से मना कर दिया है। इस योजना के तहत बालोद स्टेशन में बंजारी क्षेत्रीय समूह को काम मिला था
जो हैंड प्रोडक्ट बालोद शक्ति उत्पाद के नाम से आचार बड़ी पापड़ बेचा करते थे। लेकिन अब यहां सन्नाटा है। इतने दिनों में रेलवे ने ना तो टेबल दिया ना कुछ ठेला, ना ही स्टॉल बना कर दिया सिर्फ आश्वासन देते रहे। जिसके चलते समूह की महिलाओं ने भी हाथ खड़े कर दिए। जिला मुख्यालय में ही इस असफलता से महिलाओं में निराशा देखने को मिल रही है। तो वहीं केंद्र सरकार की अच्छी भली योजना यहां धराशायी हो गई है।
साख बचाने भाजपाई नेता लिख चुके रेलवे के उच्च अधिकारियों सहित सांसद को पत्र
ज्ञात हो कि उक्त योजना केंद्र सरकार की है। भाजपाई इसका प्रचार-प्रसार भी करते रहते हैं। लेकिन बालोद जिला मुख्यालय में ही योजना दम तोड़ चुकी है। साख बचाने के लिए स्थानीय भाजपा नेता रेलवे के अफसरों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी पत्र लिखकर समस्या से अवगत करा चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी शहर मंडल के अध्यक्ष सुरेश निर्मलकर सांसद मोहन मंडावी को भी पत्र लिख चुके हैं । जिसमें उन्होंने एक स्टेशन एक उत्पाद स्वदेशी पद्धति से हस्तनिर्मित वस्तुओं के विक्रय बालोद रेलवे स्टेशन में करने हेतु स्थाई दुकान की मांग रखी है। लेकिन अब तक उनके पत्र पर भी कोई अमल नहीं हो पाया है। समूह की महिलाओं ने स्थाई स्टाइल बनाकर देने की मांग को लेकर डीआरएम, जीएम से भी बात की थी लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। जब मार्च में महिलाओं ने स्टॉल लगाना बंद किया तब भी अफसरों द्वारा 1 महीने के भीतर स्टॉल बनाकर देने की बात कही थी लेकिन आज अप्रैल के बाद मई भी बीतने वाला है इसके बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसके चलते अब महिलाओं की उम्मीद भी टूट गई है।
जून से मार्च तक खुद के खर्चे से लगाते थे स्टॉल, बंदरों के उत्पात से थे परेशान
समूह की अध्यक्ष चितरेखा साहू, अनिता देशमुख, रेणुका निर्मलकर संतोषी यादव धनेश्वरी ठाकुर, सचिव सावित्री ठाकुर ने बताया कि 26 जून 2022 से उद्घाटन के बाद से लगातार यहां स्वयं के खर्चे पर स्टॉल लगाते थे वहां स्थाई स्टाल नहीं होने से सामानों को रात में वापस ठेला लगा कर लाना पड़ता था। तो वहीं खुद ही टेबल कुर्सी का इंतजाम करना पड़ता था। रेलवे से स्टॉल लगाने के लिए कोई सुविधा नहीं मिलती थी तो वहीं बंदरों का भी काफी उत्पात था। सामान का काफी नुकसान होता था। ऐसे में भला महिलाएं कब तक नुकसान सहती। स्थाई स्टाल बनवाने की जिद पर अड़ते हुए स्टॉल लगाना बंद ही कर दिया।
