विभिन्न मुद्दों को लेकर सरपंचों की हुई बैठक, आंदोलन की कर रहे तैयारी



गुरुर। गुरुर के जनपद पंचायत में ब्लॉक सरपंच संघ की बैठक रखी गई। जिसमें सरपंचों की विभिन्न समस्याओं और मुद्दों पर चर्चा हुई। वहीं शासन-प्रशासन द्वारा समस्याओं का हल नहीं निकाले जाने की स्थिति में आंदोलन करने की चेतावनी भी दी गई। सरपंच संघ अध्यक्ष यशवंत पुरी गोस्वामी ने कहा कि अभी शासन की योजनाओं के तहत विभिन्न कार्य होने हैं। एन वक्त में सचिव और रोजगार सहायक हड़ताल पर जा रहे हैं ।काम छोड़कर हड़ताल पर चले जाते हैं। जिसका हम विरोध करते हैं। स्पेसिमेन चेंज करने की बात कही जा रही है वहीं दूसरी ओर समस्त कार्यों और समस्त मूलभूत कार्यों का भुगतान करने स्थाई प्रभार की सुविधा दिया जाए। वर्तमान में गर्मी से उपजी समस्या जैसे पेयजल का कार्य प्रभावित हो रहा है। जिससे सरपंच गण परेशान है। विवाद की स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। सौ बात की एक बात जब से पंचायत में कार्य कर रहे हैं बदले में हड़ताल, जैसे कभी रोजगार सहायक तो कभी सचिव। सिर्फ सरपंच लोग ही अंदर ही अंदर घुट रहे हैं।

वही बैठक में सभी सरपंचों ने कहा कि जल जीवन मिशन में जमकर लापरवाही हो रही। सीसी रोड को खोदकर छोड़ दिया गया है। आधे अधूरे काम पड़े हैं। रोड़ को उखाड़ दिया गया है। गांव में 108 की गाड़ी हो चाहे कोई एंबुलेंस गांव में नहीं जा पा रही है। सरपंचों ने एक स्वर में यह मांग रखी कि जल जीवन मिशन का कार्य करने वाले मुख्य ठेकेदार का नाम नंबर पंचायत के सूचना पटल में लिखा जाए। ताकि किसी को शिकायत हो तो उन्हें बता सके। यहां मुख्य ठेकेदार ठेका तो लिए हैं लेकिन उनके अधीन कई पेटी ठेकेदार कार्य कर रहे हैं। मुख्य ठेकेदार तक शिकायत पहुंचाने में कई चरण लग जाते हैं। ठेकेदार स्वयं मौजूद नहीं होते। जिसके कारण कार्य में गुणवत्ता भी नहीं आ रही है। वही इंजीनियर गोलमोल जवाब देते हैं। वे तो मौके पर निरीक्षण के लिए जाते भी नहीं है। इस कार्य को गंभीरता से नहीं लेते हैं। सरपंच संघ अध्यक्ष यशवंत पुरी गोस्वामी ने कहा कि स्कूल, आंगनबाड़ी से संबंधित दो से तीन करोड़ का कार्य स्वीकृत हुआ था। उसे भी प्रशासन द्वारा सीधे आर ई एस विभाग को ठेका दे दिया गया है। जबकि आगे सरपंच ही सत्यापन करते हैं। कौन से स्कूल आंगनबाड़ी को बनवाना है कहां क्या काम करवाना है यह जानकारी सरपंच के पास होती है ।प्रशासन ठेकेदारी परंपरा को बढ़ावा दे रहा है। जो पंचायत के अधिकारों का हनन है। वहीं मनरेगा में 60 अनुपात 40 का पालन नहीं हो रहा है। सिर्फ मजदूरी का कार्य दिया जा रहा है। मनरेगा के भुगतान में भी देरी की जा रही है। सभी सरपंच परेशान और कर्जदार हैं। सभी मांगों पर ठोस निर्णय ना होने की स्थिति में उग्र आंदोलन की चेतावनी सरपंचों ने दी। पीएचई विभाग के प्रति भी सुस्ती के लिए आक्रोश जताया गया। कहा गया कि पेयजल का कार्य पूर्ण रूप से ठप पड़ा हुआ है। विभाग इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है।

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