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कुरीति की बेड़ियां तोड़ आगे बढ़ रही महिलाएं, अब साहू समाज ने लिया निर्णय: विधवा माताएं शादी में सौंप सकेगी मौर

दीपक देवदास, बालोद/ गुरुर। साहू समाज ने रूढ़िवादिता से आगे बढ़ते हुए एक अच्छी पहल की शुरुआत की है। अब साहू समाज में विधवा माताओं को भी मोर सौंपने का अधिकार दिया गया है। अब तक इस तरह का कदम उठाने वाला यह पहला समाज माना जा रहा है। समाज में व्याप्त वर्षों पुराने कुरीतियों, रूढ़ीवादी परंपराओं को दूर करने और समाज के सभी वर्ग के लोगों को समानता का अधिकार दिलाने के लिए साहू समाज द्वारा समय-समय पर अनेक निर्णय लिए जाते हैं। जो समाज के लिए स्वागत योग्य होते हैं। साथ ही अन्य समाज के लिए भी अनुकरणीय बन जाते हैं। इसी परिपेक्ष्य में ग्राम भिराई परिक्षेत्र कंवर तहसील गुरुर के विधवा मां दामिनी साहू पति स्वर्गीय आनंदराम साहू के द्वारा अपने इकलौते पुत्र भविंद्र कुमार के विवाह में अपने पुत्र का मोर सौंप कर सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाई। जो समाज के लिए स्वागत योग्य है। इस कुरीति को दूर करने के लिए समाज के समाजिक पदाधिकारियों का सहयोग मिला। इसमें ग्रामीण साहू भिराई के अध्यक्ष बालाराम साहू, महेंद्र कुमार साहू, रामनाथ साहू, देवमन साहू, अश्वन साहू, लेख राम, शिवनंदन, अश्वनी, महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारी एवं नवीन परिक्षेत्र पलारी के अध्यक्ष प्रेम लाल साहू, आशाराम जयमाला, नवल किशोर साहू एवं गांव के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। सभी ने उक्त निर्णय को सही बताया।

क्या कहना है प्रदेश साहू संघ के अध्यक्ष का

प्रदेश साहू संघ के अध्यक्ष बालोद जिला के रहने वाले टहल साहू ने कहा कि प्रदेश के समस्त जिला साहू संघ अध्यक्षों के नाम पत्र जारी कर सामाजिक नियमावली के परिपालन के संबंध में जानकारी दी गई है। जिसमें बताया गया है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ के नियमावली के अनुसार अब समाज की विधवा माता, बहन को घर, परिवार एवं समाज के प्रत्येक धार्मिक मांगलिक कार्यों में भाग लेने की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की जाती है। साथ ही विधवा मां अपने बच्चों की शादी ब्याह में पुत्र पुत्री को मौर सौंपने का पूर्ण अधिकार प्रदान किया गया है। एक अन्य निर्णय के तहत किसी भी माता बहन की विधवा होने पर तालाब में चूड़ी उतारने की परंपरा को खत्म करते हुए विधवा माताओं बहनों का चूड़ी उतारने का कार्यक्रम समाज के बुजुर्ग माताओं के द्वारा घर पर ही पूर्ण किए जाने तथा उसके पश्चात तालाब का कार्यक्रम किए जाने के साथ ही समाज, जिला, तहसील , परिक्षेत्र ग्राम स्तर पर सामाजिक जनों से लिए जाने वाले दंड प्रक्रिया में सरलीकरण किए जाने और समाज के प्रत्येक वर्ग को मुख्यधारा से जोड़कर साहू समाज के सर्वांगीण विकास में सभी को सहभागिता निभाने का निवेदन प्रदेश साहू संघ ने किया है।

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