कुदरत का करिश्मा: जिस बच्ची को डॉक्टर कहते थे दिमाग विकसित नहीं होगा, वह बच्ची आज ब्रेल लिपि से कर रही पढ़ाई, स्कूल में है टॉपर



दीपक देवदास, गुरुर। आज हम एक ऐसी 11 साल की बच्ची की कहानी बता रहे हैं जो दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत है। इस बच्ची का जब जन्म हुआ तो वह दृष्टिहीन थी। उसकी आंखें भी ठीक से नहीं खुल रही थी। ऐसे में डॉक्टरों ने भी निराशा जताते हुए कह दिया था कि यह आगे चलकर ज्यादा विकसित नहीं हो पाएगी। इसकी बुद्धि भी कम हो सकती है। पर बच्ची जैसे-जैसे बड़ी होती गई उसकी स्थिति में कुछ सुधार हुआ। हालांकि वह आज भी दृष्टिबाधित है। पर आज वह बच्ची कक्षा पांचवी में है और ब्रेल लिपि से अच्छी खासी पढ़ाई कर लेती हैं। वह अपने दृष्टिबाधित बच्चों के बीच टॉपर भी हैं। कचांदुर के दिव्यांगों के आवासीय स्कूल में वह बच्ची पढ़ती है। जिनका नाम है दुलेश्वरी। बच्ची की हालत में सुधार को उनके परिजन कुदरत का करिश्मा मानते हैं और ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।गुरुर ब्लाक के ग्राम गंगोरीपार में आज से 11 साल पहले इस बच्ची का जन्म सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरुर में हुआ था। जब कुमारी दुलेश्वरी का जन्म हुआ तब उनकी दोनों आंखें नहीं थी। तब गुरूर के डॉक्टरों ने ईलाज के लिए बठेना हॉस्पिटल धमतरी में रेफर कर दिया। वहां उस बच्ची का इलाज डॉक्टर पटौंदा ने किया और उन्हें रायपुर मेकाहारा हॉस्पिटल में भेज दिया। वहां पर भी बच्ची का इलाज हुआ लेकिन जो इलाज होना था वह नहीं हो पाया। बल्कि डॉक्टरों का कहना था कि यह जो बच्ची है वह अल्प बुद्धि की होगी। गरीब पिता जीवन लाल महार यहां से वहां इलाज कराते थक जाने के बाद बच्ची को वापिस घर में ले आए। लाने के बाद भगवान के भरोसे रहने लगे कि मेरी बच्ची जैसे भी है ठीक है। उसका लालन-पालन करने लगे लेकिन 21से 25 दिन के बाद कुमारी दुलेश्वरी का एक आंख हल्का सा खुलने लगा। मानों की एक रत्ती के बराबर और उस आंख में उसे थोड़ा थोड़ा दिखने लगा। फिर कुछ दिन बाद उसकी एक और आंख वह भी खुलने लगी। लेकिन उस आंख से अभी तक उसको दिखाई नहीं देता। आज कुमारी दुलेश्वरी 11 साल की हो गई है और पढ़ाई भी करने लगी है। कक्षा प्रथम के बाद स्कूल के टीचर माधव साहू ने जो उस समय ग्राम गंगोरीपार में शिक्षक थे। उन्होंने ब्रेल लिपि की पढ़ाई के बारे में बताया और दुलेश्वरी को आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। आज दुलेश्वरी कक्षा पांचवी में पढ़ती है। कक्षा दूसरी से शासकीय प्राथमिक शाला कंचादुर में ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ाई करती है और अपने क्लास की टॉपर है। जिस बच्ची को अल्प बुद्धि होगी कहा जाता था वो बच्ची आज अपने स्कूल और अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही है। दुलेश्वरि का सपना है कि वह बालोद जिला के कलेक्टर कुलदीप शर्मा जैसा बनना चाहती है। दुलेश्वरी के परिवार में माता पिता दादा दादी एक बड़ा भाई और एक छोटी बहन भी है। पिता जीवन लाल महार रोजी मजदूरी कर अपने घर का गुजारा करते हैं। उनका घर भी जर्जर हो चूका है और अभी तक उन्हें किसी भी प्रकार का कोई आवास का लाभ नही मिला है।

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