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नई शिक्षा नीति शिक्षा का अभिनव प्रयोग है -जगदीश देशमुख

बालोद। हाल ही में शीतकालीन लोकसभा सत्र में नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से पारित की गई है। यह शिक्षा नीति प्राचीन और अर्वाचीन शिक्षा का समन्वित रूप है ।इस शिक्षा नीति में शिक्षा का अभिनव प्रयोग किया गया है। प्रथमत: इस शिक्षा में शिक्षा मातृभाषा और आंचलिक भाषा में दिए जाने का प्रावधान है ।उल्लेखनीय है कि बच्चा अपनी मातृभाषा में किसी विषयवस्तु को आसानी से सीख सकता है ।शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्ति से राष्ट्र निर्माण है इसलिए सीखने को रुचिकर बनाया जावे तो शिक्षा के साथ समाज में आमूलचूल परिवर्तन दिखाई पड़ता है ।मातृभाषा का अर्थ उस प्रांत में बोली जाने वाली भाषा से है चाहे वह तमिल ,तेलुगू, मलयालम, कन्नड़ ,हिंदी तथा अंग्रेजी ही क्यों ना हो? इस पर विशेष जोर दिया गया है। उक्ताशय के विचार भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रांतीय कार्यसमिति सदस्य, शिक्षाविद एवं वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश देशमुख ने नई शिक्षा नीति पारित होने पर व्यक्त किया। श्री देशमुख ने बताया कि 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है। शिक्षा नीति की उल्लेखनीय बातें सरल तरीके से इस प्रकार अंकित किया गया है कि स्कूली शिक्षा को 5 +3+ 3 +4 फार्मूले की तरह पढ़ाया जाएगा। 9 से 12वीं तक की कक्षाएं सेमेस्टर में होगी। दसवीं बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है ।वहीं कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी ।ग्रेजुएशन पहले साल सर्टिफिकेट ,दूसरे साल डिप्लोमा तीसरे साल डिग्री मिलेगी। तीन साल डिग्री उन छात्राओं के लिए है जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं लेना है। वही हायर एजुकेशन लेने वाले छात्रों को 4 वर्ष की डिग्री करनी होगी। 4 साल की डिग्री करने वाले एम ए कर सकेंगे। एमए के छात्र पीएचडी कर सकेंगे ।वहीं छात्र बीच में ही दूसरे कोर्स भी कर सकते हैं ।अलावे इसके बहुत सारे नीतिगत निर्णय किए गए हैं। जिसे विस्तृत अध्ययन करने की आवश्यकता है।

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