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स्कूल परिसर को नशा मुक्त बनाने काम करेंगे शिक्षक, बच्चों पर रहेगी नजर

नावेल टीचर्स क्रिएटिव फाउंडेशन ने ऑनलाइन संगोष्ठी के साथ बनाई रणनीति

बालोद। शिक्षक अपने स्कूल परिसर को नशे से मुक्त करने के लिए पहल करेंगे। वह बच्चों के साथ-साथ गांव व आसपास के असामाजिक तत्वों पर भी नजर रखेंगे। जो स्कूल परिसर को नशे में जकड़ने का काम करते हैं। मसलन स्कूल के आसपास सिगरेट, बीड़ी, पाउच, शराब शीशी फेंकना आदि पर प्रतिबंध लगाएंगे तो वहीं इसके आसपास बिक्री पर भी मनाही करेंगे। शिक्षकों द्वारा इसके लिए विगत दिनों ऑनलाइन संगोष्ठी कर रणनीति तैयार की गई। ये पहल नावेल टीचर्स क्रिएटिव फाउंडेशन के द्वारा शुरू की जा रही है। जिसमें बालोद ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के शिक्षक गण भी जुड़े हुए हैं। नॉवेल टीचर्स क्रिएटिव फाउंडेशन के द्वारा अंतराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस पर ऑनलाइन शैक्षिक संगोष्ठी आयोजित किया गया था। संगोष्ठी का विषय, अपने विद्यालय के बच्चो के लिए नशामुक्त रखने हेतु किए
गए प्रयास था। नशे के लत से छुड़ाने हेतु प्रयास, नशा मुक्ति हेतु जनजागरुकता थीम पर शिक्षक काम करेंगे। एनटीसीएफ के अध्यक्ष अरुण कुमार साहू ने कहा शिक्षक ही ऐसा माध्यम है जिससे वह अपने स्कूल के बच्चो के साथ मिल कर समाज कल्याण के लिए नशा को दूर कर सकता,अभियान ,नई चेतना ला सकता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हेमेंद्र आचार्य महासमुंद ने बताया उन्होंने शराब, सिगरेट,बीड़ी पर बहुत से शोध लिए,परिणाम बहुत ही भयावह निकला। कार्यक्रम प्रभारी कैशरीन बेग,बी यदू ,प्रतिभा त्रिपाठी,गायत्री साहू,मीनाक्षी सोनी,रंजना साहू धर्मेंद्र कुमार श्रवण नशामुक्ति पर प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे है। नुक्कड़ नाटक,जनसंपर्क करके जागरूक कर रहे है,नशा करने का कारण पता करना,स्कूल परिसर को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रत्येक दिन बच्चो पर ध्यान देना,बाहरी लोग जो स्कूल परिसर को नशे की पाउच, बोटल फेक्कर खराब कर देते है उन पर रोक टोक करके परिसर को साफ बनाया,जो पालक अपने बच्चो को पाउच,सिगरेट दुकान से लाने कहते हैं,उन्हे मना किया गया।सभी ने माना हमारे शिक्षक, बच्चे नशामुक्ति बनाने के सशक्त माध्यम है।

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