बालोद। जिले में खेती के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चिया सीड की खेती अब किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है, और इस बदलाव के केंद्र में हैं जगन्नाथपुर निवासी योगेश्वर देशमुख (मार्गदर्शक), जिनके मार्गदर्शन में इस नई पहल की शुरुआत हुई।
🌱 योगेश्वर देशमुख के मार्गदर्शन में शुरू हुई पहल
बालोद जिले में चिया सीड की खेती की नींव जगन्नाथपुर निवासी योगेश्वर देशमुख के मार्गदर्शन में रखी गई।
उन्होंने किसानों को इस फसल की तकनीक, उत्पादन प्रक्रिया और बाजार संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
यही मार्गदर्शन आज जिले में कृषि नवाचार का आधार बन रहा है।
👨🌾 डॉ. संदीप बेलचंदन बने प्रेरणा स्रोत
ग्राम सिब्दी (तहसील अर्जुन्दा) के प्रगतिशील किसान डॉ. संदीप बेलचंदन ने लगभग 3 एकड़ भूमि में चिया सीड की खेती शुरू कर नई मिसाल पेश की है।
उनकी सफलता के पीछे भी योगेश्वर देशमुख का मार्गदर्शन अहम रहा है।
अब उनके खेत अन्य किसानों के लिए सीखने का केंद्र बन चुके हैं।
💰 कम लागत, ज्यादा मुनाफा: यही है खासियत
चिया सीड को “सुपरफूड” माना जाता है और इसकी बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है।
मुख्य फायदे:
- कम लागत में अधिक मुनाफा
- कम पानी में तैयार होने वाली फसल
- कम कीटनाशक की जरूरत
- कम समय में उत्पादन
- बाजार में ऊंची कीमत मिलने की संभावना
📈 नीमच मंडी में मिल रही बेहतर कीमत
चिया सीड की बिक्री के लिए मध्यप्रदेश की नीमच मंडी एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है।
यहां किसानों को अच्छे दाम और मजबूत बाजार मिल रहा है, जिससे उनकी आय में सीधा लाभ हो रहा है।
🌾 किसानों के लिए बन रही नई उम्मीद
जिले के कई किसान अब इस खेती को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।
वे डॉ. बेलचंदन के खेत का निरीक्षण कर तकनीक सीख रहे हैं, जिससे यह पहल तेजी से फैल रही है।
🚜 कृषि नवाचार की दिशा में बड़ा कदम
जगन्नाथपुर निवासी योगेश्वर देशमुख के मार्गदर्शन और किसानों की नई सोच से चिया सीड की खेती अब बालोद में कृषि परिवर्तन का उदाहरण बन चुकी है।
यह फसल पारंपरिक खेती के साथ एक बेहतर आय विकल्प प्रदान कर रही है।
🔮 भविष्य में बनेगा बड़ा उत्पादन केंद्र
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह मार्गदर्शन और बाजार सहयोग मिलता रहा, तो आने वाले समय में बालोद जिला चिया सीड उत्पादन का प्रमुख हब बन सकता है।
