DAILY BALOD NEWS

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हे भगवान-भक्ति से पहले भक्तों की ऐसी दशा क्यों मूर्तिकारों ने कहा साहब मूर्तियां तो बिक नहीं रही अब कहां रखना है यही बता दो, पढ़िए नवरात्रि में कोरोना से जूझ रहे इन मूर्तिकार व चित्रकारों की मार्मिक व्यथा


बालोद। इस नवरात्रि में भी कोरोना का साया बरकरार है। शासन प्रशासन ने 28 तरह के नियमों को पालन करने के लिए आदेश भी जारी कर दिया है। पर उन नियमों का पालन कर पाना मंदिर समिति व आयोजन समिति के लिए भी मुश्किल सा हो गया है। ऐसे में समितियां ऑर्डर पर बनाई जाने वाली दुर्गा माता की मूर्तियों को अब खरीदने से इंकार कर रही है। इसका सीधा असर मूर्तिकारों पर पड़ रहा है। जो अब बेहद ही घाटे में पड़ गए हैं। जिले के मूर्तिकार चित्रकार संघ द्वारा कलेक्टर के नाम से ज्ञापन सौंपकर यह सवाल उठाया गया कि साहब आपके आदेश के कारण माता की मूर्तियां नहीं बिक रही है। जो आर्डर मिले थे वह भी अब कैंसिल हो गए हैं। जो एडवांस हमें मिला था वह मूर्ति बनाने में खर्च हो गए हैं। अब घर कैसे चलाएं। जो अगर मूर्तियां बिकी नहीं तो उन मूर्तियों को रखना कहां है यह भी बता दीजिए। अपनी मार्मिक व्यथा बताते हुए संघ के मूर्तिकार और चित्रकारों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर रास्ता दिखाने की अपील की है।

3 नियमों का हो रहा विरोध, जिसके चलते बन गई है यह स्थिति


मूर्तिकार चित्रकार संघ द्वारा प्रमुख रूप से जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के तीन बिंदुओं का विरोध किया जा रहा है। जिसके चलते आयोजन समिति भी मूर्तियों के आर्डर को स्थगित कर रही है। जिसमें एक बिंदु है पंडाल स्थल पर 3000 वर्ग फीट जगह होना। जो कि हर आयोजन समिति के लिए मुमकिन नहीं है। दूसरा बिंदु है आयोजन समिति द्वारा पंडाल स्थल पर 4 सीसीटीवी कैमरा लगवाना। इस पर आयोजन समितियों का कहना है कि 15 से 20000 में नवरात्र उत्सव संपन्न हो जाता है तो वहां अकेले कैमरा लगवाने के लिए कहां से खर्च करेंगे। चंदा करके ऐसे ही आयोजन होता है। तीसरा बिंदु है अगर आयोजन के दौरान कोई कोरोना का शिकार हुए तो समिति को उसके इलाज का खर्च उठाना पड़ेगा। इन नियमों के चलते आयोजन समिति उत्सव के आयोजन से ही पीछे हट गई है। मूर्तियों को दिया गया आर्डर निरस्त करवा दिया गया है। जिसके चलते माता की तैयार मूर्तियां भी बिक नहीं पा रही है। सजावट के बिना उन मूर्तियों को मूर्तिकार अपने पास रखे हुए हैं, लेकिन उन्हें सालभर रखने के लिए सुरक्षित ठिकाना भी नहीं है। मूर्ति कारों का कहना है कि हम सब गरीब परिवार किराए से जगह लेकर मूर्तियां बनाते हैं और नवरात्रि से पहले उन्हें तैयार मूर्तियों को बेंचते हैं लेकिन अब जब मूर्तियां ही नहीं बिक रही है तो इन मूर्तियों को हम रखेंगे कहा?इन्हें साल भर कैसे सुरक्षित रख पाएंगे? आने वाला दिन कैसा होगा, कोई नहीं जानता। ऐसे में इन मूर्तिकार और चित्रकारों के सामने आजीविका का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जिसको लेकर मूर्तिकार चित्रकार संघ ने ज्ञापन देकर शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इसका क्या तोड़ निकालती है। कोरोना सबकी जिंदगी पर प्रभाव डाला है, अब इससे मूर्तिकार और चित्रकार संघ भी अछूता नहीं है। संघ के अध्यक्ष मूर्तिकार प्रीतम साहू, उपाध्यक्ष इतवारी कुंभकार, कोषाध्यक्ष देवेंद्र सिन्हा, सचिव देवेंद्र साहू, मीडिया प्रभारी टिकेश्वर कुंभकार हेमलाल क सहित अन्य लोगों का कहना है कि हमारी मांगों पर विचार करते हुए सरकार हमारी समस्या का समाधान करें तो ही हम इस हाल में गुजर-बसर कर पाएंगे।

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