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नए सत्र में शिक्षा की गुणवत्ता में लायेंगे निखार: आवश्यक दक्षताओं एवं कौशलों के विकास हेतु दिया गया 404 शिक्षकों को प्रशिक्षण

गुरुर | विकासखंड गुरुर के अंतर्गत विकासखंड स्तरीय एफएलएन प्रशिक्षण के तृतीय चरण का आयोजन 24 से 28 जून तक हुआ.

जिसमें 29 संकुल के कक्षा 4थीं एवं 5 वीं पढ़ाने वाले शिक्षकों का प्रशिक्षण विकासखंड शिक्षा अधिकारी ललित कुमार चंद्राकर एवं बीआरसीसी चन्द्रभान सिंह निर्मलकर के कुशल मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

तीन चरणों में विकास खंड गुरूर के 114 प्रधान पाठकों एवं 287 सहायक शिक्षक सहित 404 शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों में समझ के साथ पढ़ने के अलावा ऐसी कुशलता का विकास हो जिससे कि बच्चा किसी भी क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना सके. शिक्षक अपने छात्रों में नैतिक शिक्षा के साथ ऐसे गुण का परिमार्जन करें कि वह नौकरी नहीं मिलने की स्थिति में आजीविका और रोजगार की दृष्टि से कुशल प्लंबर, मोबाइल, कंप्यूटर रिपेयर, लाइट फिटिंग आदि तकनीक विषयों में दक्षता प्राप्त कर सके. बच्चे यदि किसान भी बने तो उसे अपनी कृषि के क्षेत्र में नई तकनीक का उपयोग करते हुए अन्य की तुलना में अपने उपार्जन की उन्नति करें. नई शिक्षा नीति में इसी को कौशल विकास कहा गया है. बुनियादी साक्षरतम संख्यात्मक ज्ञान, उद्देश्य भी यही कहता है कि हमारा बच्चा अपने दैनिक जीवन की वस्तुओं के आदान-प्रदान में अच्छे से समझ रख सके।
प्रशिक्षण सभी प्रशिक्षार्थियों को मौखिक भाषा विकास के अंतर्गत डिकोडिंग पठन, लेखन, भाषा के अभ्यास पुस्तिका, पाठ्यपुस्तक शिक्षक संदर्शिका का उपयोग करने की रणनीतियां बताई गई। 21वीं सदी के कौशल को उत्पादक एवं कामगार का उदाहरण देकर विस्तार से समझाया। सीखना क्या है, इसमें कौशल के अंतर्गत सिक्स-सी (six-c) के छः चरणों पर प्रकाश डाला गया। जिसमें 1.Critical Thinking-समालोचनात्मक विचार, 2.Creative Thinking =रचनात्मक विचार,3.Collaboration=परस्पर सामंजस्य,4.Communication=अभिव्यक्ति या संप्रेषण,5.Compassion=सहानुभूति,6.Confidence=आत्मविश्वास है. मूल्यांकन के तीन स्तर बताया गया। जिसके अंतर्गत 1.असर सर्वे -जो स्टेट स्तर का है। यहां तक पहुंचने वाले 60%बच्चे है,2.नासा NAS-जो राष्ट्रीय स्तर का है। यहां तक पहुंचने वाले 30%बच्चे है।,3.पीसा-जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर का है। यहां तक पहुंचने वाले 10%बच्चे है। और नवाजतन का उद्देश्य बच्चों को पीसा स्तर पर ले जाना है। बच्चों को पीसा स्तर पर ले जाने के लिए 4 चरण 1.स्वयं,2.समुदाय,3.भौतिक संसाधन,4.प्रशासन को महत्वपूर्ण बताया गया। एफएलएन लक्ष्य प्राप्ति में पुस्तकालय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रश्न रखा गया कि शुरुआती कक्षाओं के लिए पुस्तकालय करता क्या है? इस पर सभी शिक्षक साथियो के द्वारा चर्चा परिचर्चा किया गया. जिसमें कुछ विचार बिन्दू सामने आये – जैसे लिखित संसार से परिचय , किताबों से वास्ता , कहानियो से जुड़ाव., सामाजिक भावनात्मक जरूरतें, अभिव्यक्ति कौशल, स्व अध्ययन करने की क्षमता । एक सक्रिय पुस्तकालय के लिए क्या -क्या चीजें आवश्यक होनी चाहिए, इस पर चर्चा किया गया. सभी शिक्षक साथियों के द्वारा बहुत अच्छे से विचार रखा गया. जिससे हम सबको एक -दूसरे से सीखने का अवसर मिला। पुस्तकालय में की जाने वाली गतिविधियो – मुखर वाचन, सहपठन, जोड़ी में पठन, स्वतंत्र पठन के बारे में बताया गया। साथ ही पुस्तकालय में कहानी पढ़ने और सुनने के बाद की जाने वाली गतिविधियों, पुस्तकालय प्रबंधन हेतु मुख्य बिन्दू, के बारे में जानकारी दी गई। एक कक्षा कक्ष में रीडिंग कार्नर कैसे बनाए,उसका उपयोग कैसे करे, एवं उनकी गतिविधियों पर चर्चा की गई। जादुई पिटारा, ईजादुई पिटारा के परिचय एवं उद्देश्य, दीक्षा पोर्टल पर उपलब्धता, IVRS फोन कॉल से आज की रोचक कहानी इत्यादि बातों के संबंध में चर्चा की गई।
इस प्रशिक्षण में एबीईओ डोमेन्द्र कुमार भुआर्य, एलएलएफ प्रभारी रमाकांत सिन्हा , एसआरजी पीतांबर साहू डीआरजी महेश्वर राजपूत, श्यामलाल सिन्हा, दिलीप कुमार साहू, लीलाराम शेवता, संतोष डहरे, मोहनलाल सिन्हा, इंदिरा उईके पुष्पा साहू, मेनका कटेंद्र रहे प्रशिक्षण प्रभारी के रूप में विकासखंड गुरूर के संकुल समन्वयक गण कृष्ण कुमार साहू, सिंधु राम साहू, दिलीप कुमार साहू, नरेंद्र कुमार साहू, दुलु राम ठाकुर, आसाराम कोराटिया, मोहित कुमार चुरेंद्र, जनक लाल साहू , सोमलाल साहू, प्रभुराम मंडावी, रोहित डढ़सेना सलेशवर कुल्हारे, जगेश लावत्रे, राजेश साहू सहित समस्त संकुल समन्वयक शामिल रहे। यह प्रशिक्षण नए शिक्षण सत्र प्रारंभ होने से पहले दिया गया ताकि सभी स्कूल खुलते ही सभी बच्चों में आवश्यक दक्षताओं एवं कौशलों के विकास हेतु प्रारंभ में रणनीति तैयार कर बच्चों के शिक्षक गुणवत्ता के विकास करने का प्रयास कर पाए।

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