न्याय की जीत: डीएनए नही हुआ मैच,,,बलात्कार का आरोपी हुआ रिहा, युवती ने की थी झूठी शिकायत



बालोद। आमतौर पर रेप और गर्भवती होने के मामले में डीएनए टेस्ट के जरिए जैविक पिता होने का प्रमाण पेश किया जाता है। अगर टेस्ट रिपोर्ट मैच कर जाए तो ऐसे मामलों में फिर लोग दोषी ठहराए जाते हैं। लेकिन बालोद जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है। जिसमें एक युवती द्वारा एक आरोपी पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था और कहा गया कि उसके दुष्कर्म के चलते वह गर्भवती हुई। लेकिन जब डीएनए टेस्ट किया गया तो वह रिपोर्ट आरोपी के डीएनए से मैच नहीं हो पाया। डीएनए टेस्ट के आधार पर आरोपी को आरोप से दोष मुक्त किया गया। बालोद न्यायालय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश प्रभारी एफटीसी बालोद, जिला बालोद के पीठासीन अधिकारी सरोज नंद दास के द्वारा आरोपी गजेन्द्र कुमार कोरो निवासी जमही को बलात्कार के आरोप में दोषमुक्त किया गया। अभियोजन के कथन अनुसार पीड़िता निवासी एक ग्राम , थाना महामाया ने आरोपी के विरुद्ध रिपोर्ट लिखाई थी कि आरोपी घर की बाड़ी के पीछे तथा अन्य स्थानों पर शादी का प्रलोभन देकर उसे पत्नी बनाकर रखने की बात कही और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर कई बार बलात्कार किया। जिससे पीड़िता गर्भवती हो गई। जिस पर पुलिस थाना महामाया द्वारा पारा 376, 506वी भा.द.सं. का अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया था। तत्पश्चात माननीय न्यायालय द्वारा डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर और संपूर्ण प्रकरण का विवेचना किया गया। आरोपी के अधिवक्ता सुनील सोनी द्वारा तर्क दिया गया कि डीएनए टेस्ट के अनुसार आरोपी उसका पिता नहीं है और उसे झूठे प्रकरण में फंसाया गया है। न्यायालय अधिवक्ता की बातों से सहमत होकर आरोपी को बाइज्जत बरी किया गया। जिससे आरोपी के परिवार वाले व अन्य शुभचिंतक न्याय की जीत बताते हुए अधिवक्ता को बधाई दिये।उक्त प्रकरण की पैरवी अधिवक्ता सुनील सोनी के द्वारा की गई।

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