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मरदेल की शिक्षिका मोना रावत ने स्कूल में शुरू किया ‘साबुन बैंक’, स्वच्छता के प्रति बच्चों को कर रहीं जागरूक

हाथ धोने की आदत को बढ़ावा देने की अनूठी पहल, साबुन दान करने वाले बच्चों को मिलेगा ‘स्वच्छता चैंपियन’ का सम्मान

बालोद/डौंडी। स्वच्छता को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों में नियमित रूप से हाथ धोने की अच्छी आदत विकसित करने के उद्देश्य से मरदेल की शिक्षिका मोना रावत ने स्कूल में अनूठी पहल करते हुए ‘साबुन बैंक’ (Soap Bank) का निर्माण किया है। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को भोजन करने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

शिक्षिका मोना रावत ने बताया कि साबुन बैंक स्कूल में जमा किए गए साबुनों का एक संग्रह है, जिसका उपयोग विद्यालय के सभी छात्र-छात्राएं नियमित रूप से हाथ धोने के लिए कर सकते हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

साबुन बैंक के संचालन के लिए विद्यालय में छात्रों एवं शिक्षकों की ‘स्वच्छता समिति’ या टीम तैयार की गई है। इसके अंतर्गत प्रत्येक छात्र से महीने में एक बार अपनी क्षमता के अनुसार एक छोटा साबुन दान करने का आग्रह किया जाता है। विद्यालय में साबुन रखने के लिए पुराने कार्डबोर्ड बॉक्स को व्यवस्थित कर ‘साबुन बैंक बॉक्स’ तैयार किया गया है।

साबुन दान करने वाले विद्यार्थियों, पालकों एवं शिक्षकों का रिकॉर्ड रखने के लिए एक रजिस्टर भी बनाया गया है। इसमें प्रत्येक माह किस कक्षा के विद्यार्थियों, पालकों एवं शिक्षकों द्वारा साबुन दान किया गया, इसकी जानकारी दर्ज की जा रही है। इससे बच्चों में सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है।

विद्यालय में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समय-समय पर पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जा रहा है। विद्यार्थियों को हाथ धोने के फायदे से संबंधित पोस्टर बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिन्हें स्कूल के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाता है। इसके अलावा ‘साफ हाथ, सुरक्षित कल’ जैसे नारों के माध्यम से भी विद्यार्थियों को स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है।

बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए यह भी बताया गया है कि सबसे अधिक साबुन दान करने वाले विद्यार्थी को ‘स्वच्छता चैंपियन’ के रूप में सम्मानित किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों में स्वच्छता के प्रति उत्साह के साथ-साथ सहयोग की भावना भी बढ़ेगी।

शिक्षिका मोना रावत ने बताया कि नियमित रूप से साबुन से हाथ धोने की आदत से डायरिया, फ्लू और कई प्रकार के संक्रमणों से बचाव में मदद मिलती है। स्वस्थ रहने से बच्चे कम बीमार पड़ेंगे और उनकी विद्यालय में उपस्थिति भी बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि साबुन बैंक जैसी छोटी लेकिन प्रभावी पहल बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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