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उड़ीसा से पहुंचे वासुदेव महाराज, चार दिन तक चला देवी-देवताओं का पूजन और शुद्धिकरण अनुष्ठान, ग्रामीणों में उत्साह

बालोद/गुण्डरदेही (भाठागांव बी), 25 जून 2026।
बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम भाठागांव बी में देवी-देवताओं के पूजन, शुद्धिकरण और ग्राम कल्याण की कामना को लेकर विशेष धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस आयोजन के लिए उड़ीसा से वासुदेव महाराज (सिरहा) को आमंत्रित किया गया, जिनके ग्राम आगमन पर ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।

जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे और अंततः 22 जून सोमवार को शाम लगभग 5:30 बजे वासुदेव महाराज ग्राम पहुंचे। उनके आगमन पर ग्रामीणों ने फूल-मालाओं और पटाखों के साथ स्वागत किया तथा पैदल यात्रा करते हुए उन्हें ग्राम के शीतला माता मंदिर तक लेकर पहुंचे।

तीन दिन तक गांव में रहा धार्मिक अनुशासन

धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरे गांव में विशेष नियमों का पालन किया गया। तीन दिनों तक कई दैनिक कार्य सीमित रहे तथा शराब, मांस और अन्य मदिरा सेवन पर सामूहिक रूप से रोक रखी गई। पूरे गांव में पूजा-पाठ, अनुष्ठान और धार्मिक गतिविधियां निरंतर चलती रहीं।

तालाब की मेड़ से निकाली गई पारंपरिक धरोहर

अनुष्ठान के दौरान दोपहर लगभग 2 बजे बिरेतरा तालाब की मेड़ के भीतर खुदाई कर पारंपरिक मान्यता से जुड़ी ‘बट लोही’ निकाली गई। उसे लाल वस्त्र में बांधकर शीतला माता मंदिर परिसर में स्थापित किया गया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।

चौथे दिन शाम लगभग 4 बजे ग्रामीणों की उपस्थिति में इसे खोला गया। ग्रामीणों के अनुसार उसके भीतर मिट्टी से ढंके हुए चार सफेद रंग के गोलाकार और तीन काले रंग के ‘अन्न कुंवारी’ प्राप्त हुए। इसके बाद उन्हें शुद्ध जल से धोकर दूध से अभिषेक किया गया।

ग्रामीणों ने इसे समृद्धि का संकेत माना

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से लोग दर्शन के लिए पहुंचे। पूरे आयोजन में लगातार लोगों की भीड़ बनी रही।

वासुदेव महाराज ने कहा कि लोकमान्यता के अनुसार जिस गांव में ‘अन्न कुंवारी’ नहीं रहती, वहां सुख-समृद्धि में कमी मानी जाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अब माता के आशीर्वाद से ग्राम में धन-धान्य, सुख, समृद्धि और संतान सुख की वृद्धि होगी।

40–45 वर्षों बाद पूरा हुआ गांव का इंतजार

ग्राम पंचायत सरपंच दोषण साहू ने बताया कि गांव में लंबे समय से इस परंपरा को लेकर चर्चा होती रही थी। लगभग 40 से 45 वर्षों बाद ग्रामीणों को इस आयोजन का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि यह पूरे गांव की सामूहिक आस्था और सहयोग का परिणाम है तथा कार्यक्रम को सफल बनाने में ग्राम पंचायत, ग्रामीण समिति और सभी ग्रामवासियों का विशेष योगदान रहा।

अंत में समस्त ग्रामवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

रिपोर्ट : रूपचंद जैन, सिकोसा

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