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बैंक की नौकरी छोड़ योग नेचुरोपैथी के लिए किया जीवन समर्पित, आदित्य को मिला गांधी फिलासफी अवार्ड

बालोद – बैंक की नौकरी नौकरी छोड़कर जीवन की रहयोग नेचुरोपैथी करना आसान नहीं होता लेकिन ग्राम माहुद (अ) के युवा आदित्य कुमार टंडन सहसाई कदम उठाया और आज उनका फैसला मिसाल बन गया है हाल ही में राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान पुणे आयुष मंत्रालय भारत सरकार गांधी फिलासफी की उपाधि प्रदान की। किसी युवा के लिए गर्व की बात होती है लेकिन आदित्य के मन में योग नेचुरोपैथी रमा था उन्होंने बैंक में रहकर भी 1000 महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने में विशेष योगदान रहा बैंक की नौकरी छोड़ कर राह पकड़ी डॉ. सी.एल. सोनवानी व डॉ. प्रमोद नामदेव के मार्गदर्शन में योग प्राकृतिक चिकित्सा की पढ़ाई कर कार्य करना शुरू किया।

महिलाओं के स्वास्थ्य पर वन औषधियां का प्रभाव

आदित्य का विषय था महिलाओं का स्वास्थ्य विलुप्त हो रही वनों औषधियां आजीविका छत्तीसगढ़ की जनजाति महिलाओं के संदर्भ में था यह शोर्ध डॉ.नैना अठाली समन्वय गांधी फैलोशिप के मार्गदर्शन में शोर्ध कार्य पूरा किया उन्होंने शोध में पाया कि वन औषधि के संरक्षण, संवर्धन और आजीविका के साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं का विषेश योगदान निभा कर आत्मा निर्भर बन रही है।

गांव से राष्ट्रीय संस्थान NIN तक का सफर

जिले के ग्राम माहुद अ निवासी आदित्य के पिता मनोहर दास वैध माता संतरीन टंडन मितानिन बेटे के उपलब्धि पर गर्वित है। बचपन से मेघावी रहे आदित्य‌ ने प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक शाला माहुद (अ) और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा भरदाकला से प्राप्त की उसके बाद अखिल भारतीय प्रकृतिक चिकित्सा परिषद दिल्ली से योग नेचुरोपैथी में डिप्लोमा व पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से दर्शन एवं योग विषय में स्नाकोत्तर किया।

आज का लक्ष्य योग नेचुरोपैथी को जन जन तक पहुँचाना
आज आदित्य श्री सहज प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग केंद्र दुर्ग में उपसंचालक के पद में रहकर योग व नेचुरोपैथी को लोगों तक पहुंचने में जुटे हैं वे मानते हैं करियर सिर्फ नौकरी नहीं सेवाभाव है उनका कहना है योग केवल शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि संतुलित और स्थिर रखता है वह प्राकृतिक चिकित्सा जीवन जीने की एक कला है यही कारण है कि मैं इसे जीवन का उद्देश्य बनाया 2013 – 2025 तक 50 से अधिक निशुल्क शिविरों का आयोजन कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और आगे भी देते रहेंगे।

30 की उम्र में बनी पहचान अनेकों सम्मान से सम्मानित

योग प्राकृतिक चिकित्सा, पर्यावरण संरक्षण, मतदाता जागरूकता, जैविक खेती वृक्षारोपण, नशा मुक्ति स्वरोजगार और अनेकों क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए अनेक सामाजिक संगठनों व एन जी ओ से जुड़कर अपनी सेवा दे रहे इसलिए शहीद वीर नारायण सिंह अवॉर्ड, आयुर्वेद रत्न अवॉर्ड, योग प्राकृतिक चिकित्सा अवार्ड, विधि रत्न अवॉर्ड, गांधी फिलासफी अवार्ड, संत गुरु घासीदास अवार्ड, योग शिक्षक अवार्ड, डॉ बी आर अंबेडकर अवार्ड ऐसे अनेकों सम्मान से सम्मानित अपना पूरा जीवन योग प्राकृतिक चिकित्सा और समाज सेवा के लिए समर्पित करने का बात कहीं।

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