हड़ताल स्थल पर ही मना रहे महिला एनएचएम कर्मचारी तीज ,करु भात से किए व्रत की शुरुआत



बालोद । छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ द्वारा नियमितीकरण/सविलियन, ग्रेड पे, लंबित 27% वेतन वृद्धि सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। NHM संविदा भैया के हड़ताल स्थल में संविदा NHM बहिनी मन करु भात खा के अपन तीजा के शुरुआत करिस। तीज का त्यौहार छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए बहुत बड़ा लोक आस्था का त्यौहार है जिसमें महिलाएं अपने मायके में करु भात खाकर 36 घंटे का उपवास करती है। परंतु शासन की बेरूख़ी के कारण NHM की संविदा महिला कर्मचारियों को बस स्टैंड हड़ताल स्थल पर कितनी मजबूरी में करु भात खाकर उपवास करना पड़ रहा है। महिला कर्मचारियों द्वारा कहा जा रहा है कि करु भात तीज उपवास में उपहार स्वरूप संगठन की मांगो पर विचार कर अतिशीघ्र पूर्ण किए जाने की आस व्यक्त की गई।

साथ ही कर्मचारियों द्वारा हड़ताल स्थल पर ही अपनी मांगों के संबंध में रंगोली बनाकर प्रदर्शन किया गया। प्रदेशभर के 16,000 से अधिक एनएचएम कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं, जिनमें बालोद जिले के समस्त कर्मचारी भी प्रतिदिन धरना स्थल पर उपस्थित रहकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। ज्ञात हो कि इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे शासकीय अस्पतालों में संस्थागत प्रसव, पैथोलॉजी जाँच (खून, पेशाब, ट्रू-नाट, सीबीनाट), टीबी, कुष्ठ, मलेरिया जांच, ओपीडी, नवजात शिशु देखभाल, स्कूल आंगनबाड़ी स्वास्थ्य परीक्षण(चिरायु RBSK), पोषण आहार वितरण, एनसीडी स्क्रीनिंग, वृद्ध स्वास्थ्य परीक्षण और आपातकालीन सेवाएं संचालित होती हैं। लेकिन हड़ताल के चलते ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हो चुकी हैं। कई अस्पतालों में ताले लटक गए हैं, मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं, वहीं रात्रिकालीन प्रसव सेवाएं पूरी तरह एवं ऑपरेशन ओटी पूरी तरह बंद हो गई हैं। उप स्वास्थ्य केंद्रों और शहरी स्वास्थ्य इकाइयों में भी ताले जड़े हुए हैं, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बदतर हो गई है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र ठोस पहल नहीं की, तो आने वाले दिनों में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह पंगु हो जाएगी।

एनएचएम कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि भाजपा के घोषणा पत्र और “मोदी की गारंटी” में स्पष्ट उल्लेख होने के बावजूद कि संविदा कर्मचारियों का 100 दिनों में नियमितीकरण किया जाएगा, पिछले 20 महीनों में 160 से अधिक ज्ञापन और निवेदन देने के बाद भी सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा।

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