jadugar
IMG-20240504-WA0003
IMG-20240504-WA0001
IMG-20240504-WA0002
festivalpost_20240408210713
lalitapimansahuji
benuramsahuji
rajeshkumarsinhaji
poshansahuji
arunsahuji
chhagandeshmukhji
IMG-20240311-WA0016
IMG-20240306-WA0000
ravi
yashwantjain
kunwar nishad
krishnakantpawar
lokeshwarisahu
benusahu
sumit
rakeshyadav
dbn
NARENDRASINHA
vivek
vikas
kranti
sanjay chaudhri
rajni
mahila
dilipsahu
poshandevangan
poshansahu
sanjaybais
tp kaushal
tomansahu
rajupatel
umesh
chhagandeshmukh
arunsahu
bhimeshdeshmukh
nishad
sumit0
anila
sangita
akbar
benuram
poshan
sanjay bais
lalita
arun
beti
bhimesh
lokeshwarisahu
devnarayansahu
बेनूराम
dhaneshwarisinha
dbn
chhagan

“श्रीकांत” फिल्म जैसी जानिए एक असली कहानी: कुछ दिखाई नहीं देता फिर भी दो दिव्यांगों ने लाया 12वीं में 77 और 82%, पढ़िए प्रेरणा देने वाली ये खबर…

कचांदूर के दो छात्रों की कहानी है प्रेरणादायक, सामान्य बच्चों के बीच रहकर स्कूल में करते थे पढ़ाई, दिखाई नहीं देता तो मोबाइल ऐप के माध्यम से सुनकर किए सिलेबस पूरा, शिक्षक और सहपाठी बच्चों का भी मिलता रहा पूरा साथ

बालोद। हाल ही में रिलीज हुई राजकुमार राव अभिनेता की फिल्म “श्रीकांत” दृष्टिबाधित दिव्यांगों के जीवन पर आधारित है। कैसे एक दृष्टि बाधित छात्र नॉर्मल बच्चों के बीच पढ़ाई करता है और आगे चलकर अपनी खुद की कंपनी खड़ी करता है और अपने जैसे दिव्यांगों को काम देता है। और दुनिया वालों के सामने बराबरी की बात करता है। इस फिल्म की कहानी असल जिंदगी पर ही बनी है और लोगों को प्रेरणा दे रही है। ऐसी ही कुछ कहानी बालोद जिले में भी सामने आई है। जहां पर दो दृष्टि बाधित दिव्यांग बच्चों ने 12वीं में 77 और 82% अंक हासिल करके लोगों को चौंका दिया है।

खास बात यह है कि यह बच्चे अलग से ब्रेल लिपि में नहीं बल्कि सामान्य बच्चों के बीच गुण्डरदेही ब्लॉक के कचांदूर के हायर सेकेंडरी स्कूल में ही पढ़ा करते थे। उन्हें कचांदूर के आवासीय स्कूल में भी रहने की सुविधा मिली थी। जहां उन्हें दिव्यांग टीचर्स विशेष मार्गदर्शन भी देते थे। साथ ही जिस स्कूल में पढ़ाई करते थे वहां के सहपाठी बच्चों और शिक्षकों का भी पूरा साथ और समर्थन मिलता था। सब के सहयोग से दोनों दिव्यांग बच्चों ने जी तोड़ मेहनत की और सामान्य बच्चों को भी पीछे छोड़ते हुए परीक्षा में एक ने 77 तो दूसरे ने 82% अंक हासिल किया। दोनों कला संकाय के विद्यार्थी हैं। ये बच्चे मूलतः हैं ग्राम सुखरी (अर्जुनी) के खेमलाल यादव जिन्होंने 77% और गुण्डरदेही वार्ड 8 के प्रियांशु सोनकर जिन्होंने 82% अंक 12वीं में हासिल किया। अब तक कचांदुर स्कूल में पढ़ने वाले दिव्यांगों का प्रतिशत 70 से 74 तक जा पाता था। लेकिन इन दोनों बच्चों ने रिकॉर्ड तोड़ सफलता पाई है। जब हमने इन बच्चों से बात की तो उन्होंने अपने अध्ययन सत्र के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में भी बताया कहा कि उनके लिए ये सब आसान नहीं था। दोनो को दिखाई नही देता फिर भी सामान्य बच्चों के बीच बिना किसी ब्रेल लिपि के पढ़ाई करना चुनौती पूर्ण रहा। ऐसे में उन्होंने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। “इंस्टा रीडर” नाम के एक ऐप के जरिए जो विशेष कर ब्लाइंड बच्चों के लिए बनाया गया है वह इसका इस्तेमाल करके पुस्तक को ऑडियो बुक में कन्वर्ट करते थे। जिसे फिर कंप्यूटर या मोबाइल के जरिए सुनकर हॉस्टल या स्कूल ही अपना सिलेबस पूरा कर पढ़ाई करते थे। क्लास में भी शिक्षक जब पढ़ाते थे तो उन्हें ध्यान से सुनते थे। मन और दिमाग की एकाग्रता बनाए रखे थे ताकि पढ़ाई से भटकाव ना हो। दोनों बच्चों ने बताया कि उनके एक सहपाठी दोस्त मोनिश साहू का उन्हें काफी साथ मिला। वह छात्र खुद तो पढ़ता था साथ ही इन दोनों बच्चों को पढ़कर पुस्तकों को सुनाता था इस तरह से पढ़ाई में वह काफी मदद करता था।

जानिए बच्चों की पारिवारिक स्थिति: एक है किसान का बेटा तो दूसरा सब्जी बेचने का बेटा

सुखरी का रहने वाला खेमलाल यादव के पिता झुम्मन यादव खेती किसानी करते हैं। उनके बड़े भैया वेल्डिंग कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने अपनी कमजोरी को मात देकर पढ़ाई में मन लगाए रखा। जिसके कारण चुनौतियों को पार करते हुए उन्होंने आज 12वीं कला संकाय में 77% अंक लाए हैं। दूसरा छात्र प्रियांशु सोनकर सब्जी बेचने वाले सोनकर परिवार का बेटा है। उनके माता-पिता दोनों बाड़ी में सब्जी उगाते हैं और बाजार में बेचने जाते हैं।

एक बचपन से दृष्टि बाधित तो दूसरे की दसवीं कक्षा के बाद चली गई रोशनी

खेमलाल यादव जहां बचपन से दृष्टि बाधित है यानी उन्हें कुछ नजर नहीं आता है।

तो प्रियांशु की कहानी थोड़ी अलग है। उसे दसवीं तक तो सब ठीक दिख रहा था। पहले वह गुण्डरदेही में ही अन्य बच्चों के बीच ही पढ़ाई करता था। लेकिन अचानक 11वीं कक्षा में जाने के बाद उसकी रेटिना की रोशनी कम होने लगी। कई जगह इलाज कराया पर सफलता नहीं मिली। अंत में उन्होंने 3 महीने पढ़ाई करने के बाद रोशनी चले जाने के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी। वे निराश हो गए थे फिर उन्हें कचांदुर के दिव्यांग स्कूल के बारे में पता चला और वहां एडमिशन ले लिए। पहले जब दिखाई देता था तो विज्ञान लेकर पढ़ाई कर रहे थे लेकिन आगे दिक्कत होने के कारण उन्होंने कला संकाय से पढ़ाई शुरू की और फिर क्या था बुलंद हौसले से चुनौतियां कम होती गई और उन्होंने 12वीं में 82% हासिल कर लिया। भूगोल में उन्हें 96 तो इतिहास में 90 नंबर मिले हैं। उनका छोटा भाई उमेश दसवीं में है। दोनों बच्चे कहते हैं कि आगे भी इसी तरह से मेहनत करके कॉलेज पूरा करके सरकारी नौकरी पाने के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करेंगे।

क्लास टीचर अरविंद शर्मा है खुद दृष्टिबाधित, अपने जैसे बच्चों को वर्षों से पढ़ा रहे हैं

बता दे कि इन बच्चों को पढ़ाई लिखाई कराने वाले आवासीय दिव्यांग स्कूल कचांदूर के शिक्षक अरविंद शर्मा स्वयं दृष्टिबाधित हैं और वर्षों से इस तरह के बच्चों को बेहतर मुकाम पाने के लिए तैयार करते हैं।

आवासीय स्कूल में उनके द्वारा आधुनिक तकनीक कंप्यूटर और मोबाइल ऐप के माध्यम से दृष्टि बाधित सहित अन्य तरह के दिव्यांगों को शिक्षा दी जाती है और फिर उन बच्चों को सामान्य बच्चों के बीच पढ़ने के लिए सरकारी स्कूलों में भी भेजा जाता है। स्कूल से छुट्टी होने के बाद यह बच्चे आवासीय स्कूल में ही रहकर पढ़ाई करते हैं।

इन दोनों बच्चों के क्लास टीचर अरविंद शर्मा का कहना है कि दृष्टि बाधित दोनों प्रतिभावान छात्रों में पढ़ने की ललक है और इसी ललक के कारण उन्होंने अपनी दिव्यांगता को नजर अंदाज कर पढ़ाई पर फोकस रखा और यह सफलता पाई। जो भी मार्गदर्शन मिलता था उन्हें दोनो बखूबी पालन करते थे। स्कूल के अन्य टीचर भी उनके पाठ्य पुस्तकों का पीडीएफ तैयार करने उन्हें ऑडियो बुक बनाने में बच्चों की मदद करते थे।

दृष्टिबाधित इन बच्चों की उपलब्धि पर क्या कहा इन्होंने?

समावेशी शिक्षा के माध्यम से दोनों दिव्यांग बच्चों ने किया है जिले का नाम रोशन: उपसंचालक

समाज कल्याण विभाग के उप संचालक अजय गेडाम ने बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि इन दोनों छात्रों का विभाग द्वारा सम्मान किया जाएगा। आवासीय प्रशिक्षण केंद्र कचांदूर के इन दोनों दिव्यांग बच्चों ने 12वीं के परीक्षा में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया है। छात्र खेमलाल पिता झुम्मन यादव ग्राम सुखरी और प्रियांशु सोनकर पिता शत्रुघन सोनकर गुण्डरदेही के दोनों छात्रों ने कक्षा 12वीं की परीक्षा दिए थे । जिसमें प्रियांशु 82 प्रतिशत एवम् खेमलाल 77 प्रतिशत प्राप्त किए हैं। जो कि संस्था के लिए भी गौरव की बात है। दोनों दिव्यांग छात्र आवासीय प्रशिक्षण केंद्र कचांदूर में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। आवासीय केंद्र कचांदूर में इन बच्चों की शिक्षा को आसान बनाने के लिए नवीन टेक्नोलॉजी का उपयोग करा रहे थे। पढ़ाई के लिए कंप्यूटर में टाइपिंग के माध्यम से अपने लिखने पढ़ने का कार्य कर रहे थे।


उनके बेहतर शिक्षा के लिए संस्था के कम्प्यूटर शिक्षक अरविन्द शर्मा द्वारा उनकी पढ़ाई लिखाई के लिए एक अनुकूल वातावरण निर्माण किया गया था। उनके सतत प्रयास और निगरानी में छात्र बेहतर प्रदर्शन कर पाए । इसके पूर्व में भी आवासीय प्रशिक्षण केंद्र के बच्चों ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन इस वर्ष का यह प्रतिशत अनुमान से अधिक है।

स्कूल के प्राचार्य सहित अन्य ने भी की बच्चों की सराहना

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कचांदूर की प्राचार्या प्रीतिबाला मुले ने दिव्यांग छात्रों की उपलब्धि की सराहना की है।

इस बेहतर प्रदर्शन के लिए विधायक कुंवर निषाद, संस्था के कम्प्यूटर शिक्षक अरविन्द शर्मा, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डिहार सिंह देशमुख, दरवेश आनन्द, संस्था के पूर्व प्रभारी शिक्षक विक्रम साहू, परमेश्वर साहू, पूर्व सरपंच संतोष चंद्राकर एवम् संस्था की वॉर्डन बिंदू साहू सहित अन्य लोगों ने भी इन छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए बधाई दिए हैं। देखिए खबर की वीडियो

You cannot copy content of this page