बालोद। देश भर में जारी ट्रांसपोर्टर और ड्राइवर संघ की हड़ताल का बड़ा असर नए साल के पहले दिन देखने को मिल रहा है। जहां सभी क्षेत्र में बसों के पहिए थम गए हैं। वहीं बस चालक कर्मचारी भी अपने-अपने क्षेत्र के बस स्टैंड में हड़ताल में डट गए हैं। बालोद बस स्टैंड में हड़ताल में तैनात बस एम्पलाइज वेलफेयर सोसायटी के जिला अध्यक्ष शेख इमरान अहमद ने बताया कि जिले में करीब 60 यात्री बसों का संचालन बंद हो गया है। हड़ताल कब तक चलेगा अभी कुछ कह नहीं सकते। शासन द्वारा लाए जा रहे नए हिट एंड रन कानून के विरोध को लेकर ये हड़ताल और विरोध है। जल्द से जल्द उक्त काले कानून को ड्राइवर के हित में शासन को वापस लेना चाहिए। ताकि स्थिति सामान्य हो सके। इधर हड़ताल की पूर्व सूचना के चलते जिला खाद्य अधिकारी द्वारा सभी पेट्रोल पंप संचालक और गैस एजेंसी संचालकों को रिजर्व स्टॉक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जा चुके हैं। स्टॉक रिजर्व करने से पहले तक कुछ जगह पर सुबह से पेट्रोल डीजल खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लगी हुई है। रिजर्व लिमिट तक स्टॉक बचने के बाद सिर्फ आपात स्थिति में लोगों को डीजल पेट्रोल दिया जाएगा ।ऐसे में कई छोटे पेट्रोल पंपों में जहां बीती रात से बिक्री बंद कर दी गई है। तो बड़े पेट्रोल पंप में सुबह से कतार देखने को मिल रही है। शहरों में स्टॉक रिजर्व होने के बाद लोग गांव के पेट्रोल पंपों की ओर रुख कर रहे हैं। ट्रक ड्राइवर सहित बस ड्राइवर संघ और विभिन्न ड्राइवर संगठन द्वारा हड़ताल किया जा रहा है। जिसके चलते नए साल के पहले दिन से ही सुबह से बसों के पहिए थम गए हैं। तो वही पेट्रोल पंप में इसका असर एक दिन पहले से देखने को मिल रहा । बीती रात को कई पंपों में लंबी कतार रही। हड़ताल के चलते नया स्टॉक आया ही नहीं था। प्रशासन ने लोगों से अपील भी की है कि पैनिक होने की जरूरत नहीं है। कुछ दिनों में स्थिति सामान्य भी हो जाएगी। पर चर्चा यह भी है कि हड़ताल कब तक चलेगा इसका कोई ठिकाना नहीं है। उम्मीद की जा रही कि दो-तीन दिन में स्थिति सामान्य होगी। नए साल के पहले दिन से लोग पेट्रोल डीजल के लिए दौड़ भाग करते नजर आए। तो वहीं बसों के पहिए थमने से बस के भरोसे सफर करने वाले लोगों को भटकना पड़ रहा।
क्या है मामला जानिए
देश में लागू हुए नए हिट एंड रन कानून के खिलाफ ट्रांसपोर्टर और ट्रक ड्राइवर हड़ताल पर चले गए हैं। भारतीय न्याय संहिता 2023 में हुए संशोधन के बाद हिट एंड रन के मामलों में दोषी ड्राइवर पर 7 लाख रुपए तक का जुर्माना और 10 साल तक कैद का प्रावधान है।ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने हिट एंड रन कानून को सख्त बनाने का विरोध किया है। संगठन ने चक्काजाम का आह्वान किया। इसके बाद से देशभर में हड़ताल शुरू हो गई है।
ट्रकों की हड़ताल से जरूरी चीजों के दाम बढ़ेंगे
इस हड़ताल का आम आदमी पर सीधा असर देखने को मिलेगा। ट्रकों की हड़ताल होने से दूध, सब्जी और फलों की आवक नहीं होगी और कीमतों पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। वहीं, पेट्रोल-डीजल की सप्लाई रुक जाएगी, जिससे लोकल ट्रांसपोर्ट और आम लोगों को आवाजाही में दिक्कत होगी।
क्या आप जानते हैं
भारत में 28 लाख से ज्यादा ट्रक हर साल 100 अरब किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करते हैं। देश में 80 लाख से ज्यादा ट्रक ड्राइवर हैं, जो हर दिन जरूरत का सामान एक शहर से दूसरे शहर ट्रांसपोर्ट करते हैं। हड़ताल के कारण इतनी बढ़ी संख्या में ट्रकों के रुकने से जरूरी चीजों की किल्लत हो सकती है।
हिट एंड रन कानून पर विचार करे सरकार
हड़ताल करने वालों का कहना है नए प्रावधान को लेकर चिंता है। हिट एंड रन के मामलों में कड़े कदम उठाने की जरूरत जरूर है। इस नए कानून के पीछे सरकार का इरादा अच्छा है, लेकिन प्रस्तावित कानून में कई खामियां हैं। इन पर दोबारा सोचने की जरूरत है। देश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान परिवहन क्षेत्र और ट्रक चालकों का है। भारत इस समय वाहन चालकों की कमी से जूझ रहा है, लेकिन सरकार का इस और कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में 10 साल की सजा के प्रावधान के बाद अब ट्रक ड्राइवर नौकरी छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। देश में एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन प्रोटोकॉल का अभाव है। ऐसे मामलों में जब कोई एक्सीडेंट होता है, तो बिना किसी जांच के बड़े वाहन चालक की गलती करार दी जाती है। यह नहीं देखा जाता की गलती बड़े वाहन चालक की है या छोटे वाहन चालक की। जब भी कोई दुर्घटना होती है तो ड्राइवर बचने के इरादे से नहीं भागता बल्कि, बेकाबू होती भीड़ से खुद की जान बचाने के लिए भागता है। ऐसे में उस पर सजा का प्रावधान और जुर्माना लगाना ठीक नहीं है।
