“मिलेट कैफे बना ‘निजी ठेका’? बालोद कॉलेज में नियमों की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल”

बालोद। छत्तीसगढ़ शासन की मिलेट कैफे योजना, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और मोटे अनाज को बढ़ावा देना है, अब बालोद कॉलेज परिसर में विवादों के घेरे में आ गई है। यहां संचालित एक मिलेट कैफे को लेकर नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

महिला समूह की जगह निजी संचालन का आरोप

सूत्रों के अनुसार, कॉलेज परिसर में स्थापित यह कैफे, जिसे महिला स्व-सहायता समूह (SHG) द्वारा संचालित किया जाना था, कथित रूप से एक निजी व्यक्ति को किराए पर दे दिया गया है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह योजना के मूल नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।

क्या कहते हैं योजना के नियम

मिलेट कैफे योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार—

  • कैफे का संचालन केवल महिला स्व-सहायता समूह द्वारा किया जाना अनिवार्य है
  • मिलेट आधारित खाद्य पदार्थों की बिक्री प्राथमिकता में होनी चाहिए
  • संचालन में पारदर्शिता और गुणवत्ता मानकों का पालन जरूरी है

इसके विपरीत आरोप है कि यहां बाहरी व्यक्ति द्वारा संचालन किया जा रहा है और मिलेट के अलावा अन्य खाद्य सामग्री भी बेची जा रही है

समय-सीमा में भी अनियमितता

कॉलेज परिसर में संचालित कैफे का समय आमतौर पर शैक्षणिक गतिविधियों के अनुरूप तय होता है, लेकिन इस कैफे के खुलने और बंद होने का समय निर्धारित मानकों से अलग बताया जा रहा है, जिससे संदेह और गहरा गया है।

महिला सशक्तिकरण पर पड़ रहा असर

यह योजना खासतौर पर महिलाओं को रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। ऐसे में यदि कैफे को किराए पर देकर किसी अन्य व्यक्ति को संचालन सौंपा गया है, तो यह महिला समूहों के अधिकारों का सीधा हनन माना जा रहा है।

प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने प्रशासन और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • क्या कैफे का नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा?
  • यदि हो रहा है, तो अनियमितताएं कैसे जारी हैं?

क्या हो सकती है कार्रवाई

नियमों के अनुसार, यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो—

  • कैफे का आवंटन निरस्त किया जा सकता है
  • संबंधित समूह के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है

जांच की मांग तेज

स्थानीय स्तर पर अब इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है, ताकि योजना के मूल उद्देश्य—महिला सशक्तिकरण और मिलेट प्रोत्साहन—को सुरक्षित रखा जा सके।

फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।

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