DAILY BALOD NEWS

EDITOR IN CHIEF – DEEPAK YADAV.9755235270

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लिखा है?….एक रचना ऋचा की..

कोरे कागज मन चंचल में, तुमने सौ सौ नाम लिखा है।
मैने तो अपने हृदय में, केवल सीता राम लिखा है।।

आसक्ति का कारण धरके, तुमने केवल मोह लिखा है।
प्रणय पात में दृग बिंदु से, मैने विरह विछोह लिखा है।।

खोकर भी सब कुछ पाया, फिर भी तुमने शोक लिखा है।
मिला नही, न चाह बची, फिर भी हमने श्लोक लिखा है।।

हर क्षण में परिवर्तित होकर, तुमने सब उपयुक्त लिखा है।
हमने हर क्षण सत्य साधकर,केवल मुक्त मुक्त लिखा है।।

हजार रंग दिखा–दिखाकर, तुमने दृष्टिदोष लिखा है।
एक निष्ट होकर मैंने,केवल–केवल परितोष लिखा है।।

      ऋचा चंद्राकर 'तत्वाकांक्षी'

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