नेत्रदान-महादान,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अरमरीकला में हुआ जागरूकता कार्यक्रम



गुरूर। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अरमरीकला में सीएमएचओ डाॅ. जे एल उइके, बीएमओ गुरुर डॉ सुनील भारती एवं सहायक नोडल अधिकारी अनिल सिन्हा के निर्देशानुसार 40वां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितम्बर तक मनाया जा रहा है। जिसके अंतर्गत चिकित्सा अधिकारी डॉ शुभम मतस्यपाल एवं नेत्र चिकित्सा सहायक अधिकारी श्री टिकेश्वर प्रसाद साहू द्वारा नेत्रदान के संबंध में जानकारी दी गई कि देश में करीब 15 लाख व्यक्ति और छत्तीसगढ़ में लगभग 12 हजार व्यक्ति ऐसे हैं, जिनका अंधेपन का कारण कार्निया में सफेदी है, जिसका इलाज केवल नेत्र प्रत्यारोपण है । कार्नियल दृष्टिहीनता के मुख्य कारण आंखों में चोट लगना, आंखों में संक्रमण, बच्चों में कुपोषण, जन्मजात दृष्टिहीनता, बच्चों में विटामिन-ए की कमी आदि है। आंखों को नुकीली वस्तुएं, पेंसिल, तीन कमान, गिल्ली डंडा, रासायनिक पदार्थों ,फटाके आदि से सावधानी रख भी कार्निया की दृष्टिहीनता से बचा जा सकता है। देश में प्रतिवर्ष 40 हजार कार्निया की जरूरत होती है, लेकिन 25 हजार कार्निया ही नेत्रदान से उपलब्ध हो पाती है। मृत्यु उपरांत नेत्रदान की गई आंखों से हम दो व्यक्तियों के जीवन में अंधापन दूर कर रोशनी ला सकते हैं और इस पुण्य काम में सहयोग कर सकते हैं। नेत्रदान मृत्यु के 6 घंटे के भीतर किया जाता है। इसमें आयु,जाति, धर्म, लिंग में भेदभाव किए बिना दृष्टिहीन लोगों को नेत्रदान से प्राप्त नेत्र को प्रत्यारोपित किया जाता है। कुछ बीमारियों जैसे सेप्टिसिमिया,पीलिया, एड्स, ब्लड कैंसर, रैबीज, जहर खाने से हुई मृत्यु,सर्पदंश, तालाब में डुब जाने से, फांसी लगाने से मृत व्यक्ति के शरीर से नेत्रदान नहीं किया जा सकता है। नेत्रदान करने वाला व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म या जाति का हो नेत्रदान कर अन्य व्यक्ति को नेत्र ज्योति प्रदान कर अमर हो जाता है । इसी लिए नेत्रदान-महादान कहलाता है। उन्होंने जानकारी दी कि नेत्रदान घोषणापत्र हेतु नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में सम्पर्क किया जा सकता । शालेय नेत्र परीक्षण कार्यक्रम के साथ नेत्रदान पखवाड़ा कार्यक्रम के माध्यम से जन-जागरूकता गतिविधि का आयोजन लगातार किया जा रहा है।
इस अवसर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अरमरीकला स्टाफ श्री सूर्यकांत अडिल,श्री आई एल ठाकुर, श्री हामैश्वर साहू, कु. सुनीता मस्के, श्रीमती भानूप्रिया देवांगन, श्रीमती श्रद्धा साहू, घनश्याम भारती, लाकेश्वर मारकंडे, मितानिन एवं ग्रामीण मरीज गण उपस्थित थे ।

You cannot copy content of this page