EXCLUSIVE-गर्व करिए इस बेटी पर- बालोद के जेल प्रहरी की बेटी ने किया कमाल, बनेगी साइंटिस्ट, बार्क में लेगी ट्रेनिंग, हुआ चयन, पढ़िए इनकी संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी, कैसे इस मुकाम पर पहुंची स्वाति साहू

बालोद/ रायपुर। बालोद उपजेल में पदस्थ जेल प्रहरी धनेश कुमार साहू की बेटी स्वाति साहू मुंबई के भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र यानी बार्क में साइंटिफिक ऑफिसर ( वैज्ञानिक)पद के लिए चयनित हुई है। जिन्हें 17 जनवरी से ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया है। इससे उपलब्धि से जेल प्रशासन सहित परिवार व स्वाति के दोस्तों के बीच हर्ष का माहौल है। तो वहीं यह अवसर बालोद जिले वासियों व स्वाति के मूल निवास खरोरा (ईल्दा ) जिला रायपुर के लिए गौरव की बात है।

पिता का कहना है कि उनकी बेटी किसी बड़ी सफलता के मुकाम पर पहुंचेगी इसका यकीन था। मैं काफी गदगद हूं। शुरू से ही बेटी मेहनती रही और लगातार प्रयास करती रही। साइंटिस्ट के लिए चयनित स्वाति साहू ने हमें बताया कि उसने अपने लक्ष्य से कभी भटकने की नहीं सोची। एक लक्ष्य बनाकर काम करती रही।

एपीजे अब्दुल कलाम के विचारों से वह काफी प्रभावित है। एक विचार आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते पर अपनी आदतें तो बदल सकते हैं और बदली हुई आदतें आपका भविष्य बदल देगी, इसने उन्हें काफी प्रभावित किया और इस विचार को वह अपने स्टडी रूम में भी लिख कर चिपका कर रखी है और रोज उसे पढ़ प्रेरित होती है। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में साइंटिफिक ऑफिसर के पद के लिए वह चयनित हुई है। बार्क देश में न्यूक्लियर रिसर्च के क्षेत्र में बहुत ही सम्मानित संस्था है।
यह है शिक्षा का सफर
स्वाति साहू का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय बोरई दुर्ग में हुआ था और उनका ग्रेजुएशन शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बिलासपुर में हुई। जहां वह 80% अंक हासिल कर कॉलेज स्तर पर भी प्रथम स्थान में रही । स्वाति का सपना था कि एक दिन वह बड़े मुकाम पर ही पहुंचेगी। साइंटिफिक ऑफिसर का यह सफर भी यूं ही आसान नहीं था। यहां तक पहुंचने में उन्हें 4 साल लगे। 2017 से वह गेट की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान ई सी आई एल का इंटरव्यू दो बार दे चुकी है बाल्को कंपनी में भी इंटरव्यू दे चुकी है। 2019 के गेट से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआर डीओ) के लिखित परीक्षा के लिए नाम आया। फिर उक्त परीक्षा पास की। उनका इंटरव्यू क्लियर किया। पर फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आ पाया। फिर भी स्वाति ने हिम्मत नहीं हारी। मेहनत और लगन से मेहनत करती रही। अंततः 2020 में बार्क में चयनित हुई। स्वाति बताती है कि बार्क में सबसे मुश्किल हिस्सा होता है इंटरव्यू का। यहां आपके ब्रांच के अनुसार ही तकनीकी विषयों के बारे में बहुत ही गहराई से सवाल पूछे जाते हैं।
यह है परिवारिक बैकग्राउंड

खरोरा, जिला रायपुर में स्वाति का परिवार खेती किसानी करता है। उनके पिता धनेश साहू बालोद उप जेल में प्रहरी है। माता उत्तरा साहू गृहणी है। उन्हें बचपन से ही उनके मामा हेमलाल साहू व दीदी डॉ नेहा साहू ने प्रेरित किया। उनके दोस्तों का भी इस संघर्ष और सफर में पूरा सपोर्ट मिला। बड़े पिताजी रमेश कुमार साहू गांव में खेती किसानी संभालते हैं। इनका संयुक्त परिवार है। दीदी डॉ नेहा साहू है। भाई अमन साहू कॉलेज की पढ़ाई कर रहे हैं। शुरुआत से ही स्वाति का स्कोप इलेक्ट्रॉनिकल था। एक ही लक्ष्य बनाकर वह आगे बढ़ रही थी। बिलासपुर के सरकारी इंजीनियर कॉलेज में पढ़ने वाली इस छात्रा ने इलेक्ट्रिकल एंड टेलीकॉमीनेशन ब्रांच में पढ़ाई की। साइंटिफिक ऑफिसर के लिए उनका इंटरव्यू 9 दिसंबर को हुआ। मार्च में एग्जाम हुआ था। 5 जनवरी को रिजल्ट आया जिसमें वह सिलेक्ट हुई। इस पोस्ट के लिए देश के अलग-अलग हिस्से से मुंबई में 231 लोग इंटरव्यू देने के लिए आए थे। जिसमें 18 लोगों का ही सिलेक्शन हुआ। जिसमें स्वाति भी शामिल है।
समय बर्बाद करने से अच्छा है समय पर मेहनत करना सीख लो

अंत में स्वाति साहू लोगों को सफलता के लिए प्रेरित करते हुए कहती है कि फिजूल की चीजों में समय बर्बाद करने से अच्छा है, समय पर मेहनत करना सीख ले। वह सोशल मीडिया से भी जुड़ी है लेकिन सिर्फ उन्हें काम के लिए वक्त देती है। व्हाट्सएप चलाती है पर फेसबुक इंस्टाग्राम नहीं। व्हाट्सएप में भी वह जरूरी काम के लिए ही समय बिताती है। बाकी समय वह अपने लक्ष्य पर ही फोकस करती है। वह कहती है कि हम अपना भविष्य तो नहीं बदल सकते लेकिन अपनी आदतें बदल सकते हैं। अगर हम अपनी आदतें सही दिशा में बदलते हैं तो हमारा भविष्य खुद ब खुद बदल जाता है। असफलता से हिम्मत नहीं हारना चाहिए, यह सीख उन्हें अपनी जिंदगी में मिली और वह प्रयास करती रही और आज सफलता उनके कदमों में है।
बार्क के बारे में जानिए

भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र मुम्बई में स्थित है। यह भारत सरकार के परमाणु उर्जा विभाग के अन्तर्गत नाभिकिय विज्ञान एवं अभियांत्रिकी एवं अन्य संबन्धित क्षेत्रों का बहु-विषयी नाभीकीय अनुसंधान केन्द्र है। भारत का परमाणु कार्यक्रम डा॰ होमी जहांगीर भाभा के नेतृत्व में आरम्भ हुआ। 6 जनवरी सन् 1954 को परमाणु उर्जा आयोग के द्वारा परमाणु उर्जा संस्थान (ए ई ई टी) के नाम से आरम्भ हुआ और तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा २० जनवरी सन् 1957, को राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसके बाद परमाणु उर्जा संस्थान को पुनर्निर्मित कर 12 जनवरी सन् 1967 को इसका नया नाम भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र किया गया, जो कि 24 जनवरी सन् 1966 में डा॰ भाभा की विमान दुर्घटना में आकस्मिक मृत्यु के लिये एक विनम्र श्रद्धांजलि थी।