स्कूल शिक्षा मंत्री ने अचानक शिक्षकों के वेबीनार में जुड़कर किया सबका उत्साहवर्धन

रायपुर । आज 09 जनवरी 2021 को समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के माध्यम से बस्तर जिले के शिक्षकों के साथ प्रारंभिक भाषाई एवं गणितीय कौशलों के विकास के संबंध में एक परिचर्चा हेतु वेबिनार का आयोजन किया गया था, जिसमें बस्तर संभाग में प्रथम के साथ संचालित सरल कार्यक्रम में बेहतर उपलब्धि हासिल किए हुए बच्चों एवं पीछे छूट रहे बच्चों का अध्यापन करा रहे शिक्षकों के साथ विस्तार से उनके अनुभवों को सुना गया । इस वेबीनार के माध्यम से राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत प्रस्तावित फाउंडेशनल लिटरेसी एवं न्यूमेरेसी पर कार्ययोजना बनाने हेतु जमीनी स्तर से आइडियाज निकालने का प्रयास किया गया ।

जब ऐसे शिक्षकों के साथ चर्चा चल रही थी तभी अचानक शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम इस वेबीनार में शामिल होकर बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों के शिक्षकों के साथ सीधे संवाद स्थापित कर जमीनी परिस्थितियों की जानकारी एवं फीडबैक लेने का प्रयास किया । उन्होंने ऐसी विषम परिस्थितियों में बच्चों को सिखाने संबंधी विधियों की जानकारी ली । स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सौ दिवसीय कार्यक्रम में किस प्रकार से शिक्षक रोचक गतिविधियों का इस्तेमाल कर स्थानीय सामग्री का उपयोग कर सरल विधि से पढ़ा रहे हैं, इसकी जानकारी दी गयी ।

बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक अमिय राठिया ने संभाग के विभिन्न जिलों में संचालित सरल कार्यक्रम एवं उसके माध्यम से बच्चों के प्रारंभिक कौशलों में हुए सुधारों की जानकारी दी। शिक्षा मंत्री के द्वारा द्वारा शिक्षकों से स्कूलों के खोले जाने के बारे में राय ली । शिक्षकों ने गाँवों में कोरोना की स्थिति बहुत कम लेकिन शहरों में इसका प्रभाव होना बताया गया । स्कूलों के खुलने पर शहरों में निवासरत शिक्षक यदि गाँवो में पढ़ने आएँगे तो इसके फैलने की संभावना होने से अवगत करवाया गया। स्कूलों को खोलने पर आधे आधे बच्चों को रोस्टर पद्धति से या फिर कक्षाओं को अलग अलग दिनों या समय पर खोले जाने का सुझाव भी कुछ शिक्षकों ने दिया । पोर्टा केबिन, आश्रम शाला और केजीबीवी में बच्चों की बहुत अधिक संख्या होने से इन संस्थाओं को खोलने से सोशियल डिस्टेन्सिंग का पालन न होने पाना और संक्रमण के ख़तरे की ओर भी इंगित किया गया ।

स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने केन्द्रों, मोहल्ला क्लासेस में कोरोना से संबंधित सावधानियों की भी जानकारी ली । सभी शिक्षकों ने अवगत कराया कि साबुन से हाथ धोने, मास्क पहनकर आने एवं दूरी बनाकर बिठाकर ही उनकी क्लासेस ली जाती हैं । उन्होंने इस संकट के समय शिक्षकों द्वारा स्वेच्छा से अध्यापन करवाए जाने पर सभी की खूब प्रशंसा की एवं बस्तर क्षेत्र में जिला प्रशासन द्वारा संचालित बुल्टू के बोल, लाउडस्पीकर स्कूल एवं मोहल्ला क्लासेस को एक ऐसा सफल उपाय बताया जिसकी वजह से बच्चों की पढाई निरंतर जारी रह सकी ।

शिक्षकों ने स्कूलों को खोले जाने के निर्णय के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय निकायों विशेषकर शाला प्रबन्धन समितियों को दिए जाने का आग्रह किया ताकि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर पालकों के साथ मिलकर इस पर उचित निर्णय लिया जा सके ।

इस संवाद में बस्तर, दंतेवाडा, कांकेर, सुकमा, बीजापुर के सुदूर अंचलों में कार्यरत शिक्षकों को मंत्री से सीधे अपने विचार रखने का अवसर मिला ।

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