दीपक यादव, बालोद। बालोद नगर के डाक टिकट संग्राहक डॉक्टर प्रदीप जैन के पास राम और सीता से जुड़ी हुई कई अनूठे डाक टिकटों का संग्रह मौजूद है। एक टिकट तो 1964 का बताया जा रहा है। जिसमें माता सीता के जयंती पर जारी हुआ था। इस टिकट में सीता महल का भी दृश्य दिख रहा है जो नेपाल में मौजूद है, तो वही एक दूसरा टिकट राम और सीता एक साथ वाले नजर आ रहे हैं। जो की 1967 का है इस डाक टिकट के ऊपर में “रामनवमी 2024” तक लिखा हुआ है। यानी यह दुर्लभ संयोग और यह टिकट का उस समय जारी होना आज लोगों को हैरान कर रहा है। ऐसे ही अनूठे डाक टिकटों की श्रृंखलाओं की प्रदर्शनी डॉ प्रदीप जैन ने बालोद शहर के पोस्ट ऑफिस में लगाई है। एक खास बातचीत में उन्होंने हमें इन टिकटों के बारे में कुछ ऐतिहासिक और रोचक जानकारियां साझा की। जो इस तरह हैं…..

अयोध्या में 22 तारीख को प्रभु श्री राम अपने नए मंदिर में विराजमान होंगे. ऐसे में चारों ओर राम मंदिर की चर्चा है. इसी दौरान एक डाक टिकट जो नेपाल से साल 1967 में जारी किया गया था वह देश भर में चर्चा में है। लोग पता लगा रहे हैं कि आखिर यह डाक टिकट कहां है और किसके पास है, तो आपको बता दें कि यह दुर्लभ डाक टिकट बालोद के डॉक्टर प्रदीप जैन के पास भी है. इस डाक टिकट को इसलिए दुर्लभ कहा जा रहा है क्योंकि इसके पीछे एक राज छिपा है. जिसे जानकर हर कोई अपने दांतों तले उंगली दबा ले रहा है.असल में भगवान श्री राम के ससुराल नेपाल से जारी करीब 57 साल पुराना एक डाक टिकट है, जो किसी अद्भुत संयोग से कम नहीं है. दरअसल, 1967 में जारी हुए इस डाक टिकट को भगवान राम और सीता को समर्पित किया गया था, जिसमें संयोगवश राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा का साल लिखा हुआ. 15 पैसे के इस डाक टिकट पर रामनवमी 2024 लिखा हुआ है. जानकारी अनुसार 18 अप्रैल 1967 को ये टिकट लॉन्च किया गया था। यह डाक टिकट नेपाल में 1967 में जारी हुआ था. इस डाक टिकट में भगवान श्रीराम धनुष-बाण के साथ हैं. उनके आगे माता सीता भी हैं. 15 पैसे के इस डाक टिकट पर ‘रामनवमी 2024’ लिखा हुआ है. इस डाक टिकट को राम नवमी के अवसर पर 18 अप्रैल, 1967 को लॉन्च किया गया था.
1967 में जारी टिकट पर क्यों लिखा है रामनवमी 2024?
इस नेपाली डाक टिकट पर जो रामनवमी 2024 में लिखा है, वह अंग्रेजी कैलेंडर में नहीं बल्कि विक्रम संवत में लिखा है. विक्रम संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे चलता है. इस तरह से साल 1967 में जारी हुए इस डाक टिकट पर 57 साल आगे का साल 2024 लिखा हुआ है. इसीलिए यह अद्भुत है ऐसा कहा जा सकता है कि इतने साल पहले जारी हुए इस टिकट पर पहले से ही प्राण प्रतिष्ठा की तारीख लिख दी गई थी.
युगपुरुष भगवान राम पर विभिन्न देशों से जारी प्रेरक डाक टिकट सनातन संस्कृति के वाहक हैं: प्रदीप जैन

बालोद के प्रतिष्ठित चिकित्सक प्रदीप जैन एक डाक प्रेमी भी है। और वर्षों से डाक टिकटों का संग्रह कर रहे हैं। रामजन्मभूमि मंदिर की स्थापना के पावन अवसर पर स्थानीय पोस्ट ऑफिस में विश्व के विभिन्न देशों द्वारा भगवान रामएवं सीताजी,हनुमानजी,जटायु आदि पर जारी विभिन्न डाक टिकटों के माध्यम से रामायण एवं सनातन संस्कृति के आकर्षक प्रसंगों को प्रदर्शित किया गया है जिनके दर्शन वे इस खास मौके पर पर करवा रहें हैं। अनादिकाल से भगवान राम के चरित्र एवं उनकी महान जीवन शैली ने केवल भारतवर्ष ही नहीं वरन समस्त विश्व के प्राचीन देशों में वहाँ की संस्कृति को प्रभावित किया है ।उपरोक्त प्रदर्शनी में नेपाल में आज से 56 साल पहले रामनवमी के पावन अवसर पर जारी डाक टिकट जिस पर हिन्दी में संवत् 2024 अंकित है वह डाक टिकट भी प्रदर्शित है।साथ ही विश्व के इकलौते हिंदू राष्ट्र नेपाल में वहाँ की बिटिया सीताजी जी के जन्मदिवस पर उनके महल के साथ जारी विश्व का एकमात्र डाक टिकट भी आकर्षण का केंद्र है।
2017 में भारत में भी हुए थे महाकाव्य रामायण पर डाक टिकट जारी

2017 में हमारे देश में महाकाव्य रामायण पर जारी डाक टिकट जिसमें भगवान राम के विवाह,वनवास,केवट की भक्ति, जटायु एवं शबरी के बेर व हनुमानजी की संजीवीनी बूटी लाने संबंधी सभी प्रेरक विषयों पर जारी 11 टिकट को भी प्रदर्शित किया गया है।साथ ही भगवान राम के वनवास से अयोध्या वापस लौटने की ख़ुशी में मनाये जाने वाले दीपोत्सव दिवाली पर्व पर भारत के अलावा अमेरिका एवं कनाडा द्वारा जारी टिकट भी सराहनीय है। प्रदर्शनी में भारत के अलावा नेपाल, थाईलैण्ड, इंडोनेशिया ,लाओस, कंबोडिया एवं श्रीलंका द्वारा भगवान राम पर जारी टिकट भी प्रदर्शित किये गये हैं।
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