बुद्ध पुर्णिमा विशेष- बालोद जिले में भी है एक ऐसा प्राचीन बुद्ध मंदिर, जिस पर नहीं है प्रशासन की नजर, वर्षों से उपेक्षित

मूर्ति तक का भी संरक्षण नहीं, जगन्नाथपुर में बौद्ध स्मारक टूटने की कगार पर
बालोद। आज 16 मई को बुद्धपूर्णिमा मनाई जाएगी। बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग भगवान बुद्ध की मूर्ति की पूजा करेंगे। भगवान गौतम बुद्ध ने इस दुनिया को दुख से मुक्ति का रास्ता दिखाया है। जो खुद एक राज पाठ का त्याग कर सन्यास की ओर अग्रसर हो कर लोगों को असली ज्ञान दिए। उनके जाने के बाद उनके अनुयाई उनके संदेशों को दुनिया भर में प्रसारित करते रहे। बुद्ध पूर्णिमा पर हम बालोद जिले में भी एक बौद्ध स्मारक की बात करेंगे। जिस पर अब तक शासन प्रशासन की कोई नजर नहीं है। और यही वजह है कि यह वर्षो से उपेक्षित है। आज स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है यह स्मारक टूटने की कगार पर आ गया है। बात कर रहे हैं बालोद ब्लाक के ग्राम जगन्नाथपुर की। जहां पर प्राचीन बौद्ध मंदिर है। यहां भगवान बुद्ध की खड़ी मुद्रा में एक मूर्ति है। कूड़ा करकट के ढेर के बीच यह मंदिर है। जिसके संरक्षण को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस गांव में प्राचीन शिव मंदिर को तो शासन द्वारा राज्य संरक्षित स्मारक के रूप में शामिल किया गया है। लेकिन उसके विकास को लेकर तो सरकार ने भी ध्यान नहीं दिया है। सिर्फ पंचायत प्रशासन द्वारा पहल की जा रही है। उसी तरह बुद्ध मंदिर भी सरकारी उपेक्षा का शिकार हो गया है।
देखरेख तक करने नहीं आता कोई
विडंबना यही है कि इस बुद्ध मंदिर और मूर्ति की देखरेख को लेकर भी कोई आगे नहीं आता है। इसके पीछे कारण गांव में उनके अनुयायियों का ना होना भी है। हैरानी वाली बात यह भी है कि कई वर्षों से यह मंदिर इस गांव में है लेकिन बालोद व आसपास जहां भी बुद्ध समुदाय से जुड़े लोग रहते हैं उन्हें भी इसकी खास जानकारी नहीं है और यही वजह है कि वे भी अब तक इसके संरक्षण को लेकर आगे नहीं आ पाए।
पंचायत प्रशासन करवाती है कभी कभार रंगाई पुताई
इस मंदिर की रंगाई पुताई का काम कभी कभार पंचायत प्रशासन और कुछ लोगों द्वारा श्रमदान से कर दिया जाता है। लेकिन अधिकतर माह मूर्ति और मंदिर दोनों ही मानो तिरस्कार झेलते रहती है। आसपास के कुछ लोग इतने लापरवाह है कि मंदिर के बगल में ही कचरा फेंक कर चले जाते हैं। कूड़ा करकट का ढेर जमा हो जाता है। और इसी गंदगी के बीच भगवान बुद्ध की प्रतिमा मौजूद रहती है।
मंदिर का ऊपरी हिस्सा टूटने लगा है
जब हम मंदिर का जायजा लेने पहुंचे तो स्थिति दयनीय दिखी। इसका ऊपरी हिस्सा टूटने लगा है। यह मंदिर कितना प्राचीन है इसकी हम पुष्टि नहीं करते। लेकिन गांव में जो शिव मंदिर है वह 11 वीं से 12 वीं शताब्दी का माना जाता है। जिसे पुरातत्व विभाग ने भी संरक्षित स्मारक घोषित किया है। ग्रामीणों के मुताबिक यह बुद्ध मंदिर भी काफी प्राचीन है। लेकिन अब तक पुरातत्व विभाग भी इस ओर नहीं दिया है। जहां एक ओर छत्तीसगढ़ में प्राचीन समय में बुद्ध से जुड़े कई स्थानों पर चीनी यात्री व अन्य लोग यात्रा कर उनकी कथा कहानियों और चीजों का संकलन करते थे। सिरपुर जैसे बड़े क्षेत्र में जहां बुद्ध के कई विहार मिले हैं। लेकिन जगन्नाथपुर में स्थित प्राचीन मंदिर और मूर्ति अब तक किसी के नजर में नहीं आई है। जब पुरातत्व विभाग के लोग गांव में प्राचीन शिव मंदिर के सर्वे को लेकर आए थे तो उस समय भी बुद्ध मंदिर को नजरअंदाज कर दिया गया। यहां अधिकारी झांकने को भी नहीं आए। इसके बाद पंचायत प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर प्रयास किया जाता रहा।
अतिक्रमण की चपेट में भी है मंदिर
मंदिर के आसपास अतिक्रमण भी बढ़ता जा रहा है। कुछ लोग मंदिर से लगे हुए जगह को अपनी जमीन बताकर वहां घेराबंदी कर रहे हैं। इससे पंचायत प्रशासन भी परेशान है। यहां के सरपंच अरुण साहू का कहना है कि वे इस मंदिर को सुरक्षित करना चाहते हैं। इसके चारों ओर ग्रील लगाकर इसे सुरक्षा देना चाहते हैं। ताकि यह प्राचीन बुद्ध मंदिर भी गांव की एक पहचान रहे। लेकिन कुछ लोग ऐसा होने नहीं दे रहे हैं। अपने स्तर पर वे बीच-बीच में प्रयास करते रहते हैं। उन्होंने गांव के प्राचीन शिव मंदिर को भी इसी तरह संरक्षित करने का काम किया है। जहां विगत 2 वर्षों से अब भव्य रूप से महाशिवरात्रि मनाई जाती है। उनका अगला लक्ष्य का बुद्ध मंदिर को सुरक्षित करने का ही है। पर इसमें कई तरह की अड़चनें आ जाती है। ग्रामीणों को भी वहां कचरा नही फेंकना चाहिए।
बौद्ध समुदाय के जिलाध्यक्ष बोले- जिला प्रशासन से करेंगे मांग
जब हमने इस प्राचीन मंदिर और मूर्ति की जानकारी बौद्ध समुदाय के जिलाध्यक्ष वामन राव वानखेड़े को दी तो उन्होंने कहा कि यह मंदिर काफी पुराना है। हालांकि इसकी हमें ज्यादा जानकारी पहले नहीं थी। इसे संरक्षित करने को लेकर जिला प्रशासन से मांग की जाएगी। वहां अगर किसी ने अतिक्रमण किया है तो उसे भी हटवाया जाएगा।