EXCLUSIVE- आदिवासी समाज ने किया है बालोद जिले में नेशनल हाईवे जाम, सीएम व राज्यपाल निवास का घेराव करने की जिद,पुलिस का पहरा,,,, पढ़िए क्या है उनकी 11 मांगे?

बालोद। बस्तर संभाग क्षेत्र के सर्व आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी विभिन्न 11 मांगों को लेकर 24 मार्च को दोपहर से बालोद जिले के पुरुर में नेशनल हाईवे धमतरी कांकेर मार्ग जाम कर दिया है। बताया जाता है कि उक्त समाज के लोग अपनी मांगों को लेकर सीएम व राज्यपाल निवास घेराव करने के लिए विभिन्न जिलों से एकजुट होकर निकले थे। पहले तो वे बड़ी गाड़ियों में अपने वीर मेला आयोजन स्थल राजा राव पठार पहुंचे थे। जहां उनके आने की खबर मिलने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गई और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। लेकिन पुलिस के साथ धक्का-मुक्की के बावजूद समाज की भीड़ पुरुर तक पहुंच गई और यहां भी चक्का जाम चलता रहा। फिर भीड़ चिटौद की ओर बढ़ी।

बगल में धमतरी जिला है। देर शाम तक पुलिस प्रशासन व आसपास जिले की टीम भी यहां पहुंची थी और समाज के लोगों को वापस लौटने समझाती रहे। लेकिन सीएम व राज्यपाल निवास घेरने जाने की बात पर अड़े रहे। जिससे देर शाम तक नेशनल हाईवे पर जहां ट्रैफिक जाम की स्थिति तो रही तो वही तनाव की स्थिति भी बनती नजर आई। बड़ी संख्या में पुलिस प्रशासन भी दल बल के साथ तैनात रहा और विभिन्न थानों के टीआई सहित आसपास के जिले के एसपी और कलेक्टर तक भी इस मामले में समाज के लोगों को समझाने के लिए पहुंचे। शाम 7 बजे तक की स्थिति में आधी भीड़ पुरुर में रुकी रही तो कुछ लोग धमतरी जिला में भी दाखिल हो रहे।

पुलिस के रोके जाने के बाद भी लोग पैदल ही आगे बढ़ते जा रहे हैं। पुलिस द्वारा उन पर पहरा लगाया गया है। कई लोगों को पुरुर में रोका गया है। ना तो समाज के लोग वापस लौटने को तैयार हो रहे हैं ना प्रशासन की समझाइश का असर हो रहा है। लोग वही रात गुजारने की बात पर अड़ गए हैं।

ये है समाज की 11 मांगे
- सरकेगुड़ा एडसमेटा, न्याययिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
2-बस्तर में सैनिकरण निरस्त करते हुए पुलिस कैंप बंद हो।
- फर्जी मुठभेड़ फर्जी मामलों में गिरफ्तारिया बंद करो।
4-जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों की तुरंत रिहाई करो।
5- अनुसूचित क्षेत्रों में संविधान सम्मत “पेसा कानून धारा 4(घ) एवं 4(ण) के तहत हर गांव में ग्राम सरकार एवं हर जिले में जिला सरकार गठन की प्रशासकीय व्यवस्था लागू हो।
6- संविधान के 5वीं अनुसूची के पैरा 5(2) के तहत अनुसूचित क्षेत्र में भू अधिग्रहण एवं भू हस्तातरण को विनियमित करने के लिए “आंध्र प्रदेश अनुसूचित क्षेत्र भूहस्तांतरण विनियम कानून (संशोधित) 1970 के तर्ज पर छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में संशोधन कर कानून बनाओ।
- ग्रामसभा के निर्णय का पालन करो, बिना ग्रामसभा सहमति के किसी भी कानून में किसी भी
परियोजना के लिए जारी भूमि अधिग्रहण निरस्त करो।
8- जनता की मौलिक अधिकारों की हनन करने वाला छत्तीसगढ़ जन सुरक्षा अधिनियम 2005 को
खारिज करो।
9- अनुसूचित इलाकों में ग्राम पंचायतों को अनारक्षित घोषणा करना बंद करो।
- अनुसूचित क्षेत्र में संविधान का अनुच्छेद 243 (य ग) का पालन करते हुए सारे गैरकानूनी नगर पंचायती /नगरपालिका को भंग करते हुए पेसा कानून के तहत पंचायती व्यवस्था लागू करो।
11- बस्तर में नर संहार बंद करें। आदिवासियों के नाम से फर्जी मुठभेड़ करना बंद करें। सिलगेर गोली काण्ड में मारे गये लोगों के परिवार को 1-1 करोड़ मुआवजा दिया जाए। मृतक परिवार के एक-एक सदस्यों को सरकारी नौकरी दिया जाए।
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