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जिले में वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस का आयोजन 27 अक्टूबर तक, देखिये क्या-क्या होगा इस दौरान

बालोद। जिले के समस्त स्वास्थ्य संस्थाओं में वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस का आयोजन 27 अक्टूबर 2020 तक किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि इस दौरान आयोडीन की कमी से होने वाले शारीरिक एवं मानसिक प्रभाव तथा बचाव हेतु किए जाने वाले तरीकों के बारे में प्रचार-प्रसार व जनजागरूकता किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शरीर को प्रतिदिवस न्यूनतम् 100 माइक्रोग्राम से 150 माइक्रोग्राम तक आयोडीन की आवश्यकता होती है। गर्भावस्था में 220 माइक्रोग्राम तक आयोडीन की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि आयोडीन शरीर में बनने वाले विभिन्न हार्मोनों का एक प्रमुख भाग है, जो मनुष्य के शारीरिक एवं मानसिक विकास हेतु अत्यंत आवश्यक है।

आयोडीन का सेवन सामान्यतः नमक के माध्यम से किया जाता है। आयोडीन युक्त नमक के सेवन से बच्चों का पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। शरीर स्वस्थ्य, उर्जावान व दिमाग तेज होता है तथा घेंघा रोग, बौनापन, भेंगापन से बचाव होता है। गर्भवती महिलाओं में गर्भपात होने का खतरा नहीं होता। आयोडीन युक्त नमक को उचित रखरखाव की आवश्यकता होती है, जिससे आयोडीन की उचित मात्रा नमक में बनी रहे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जानकारी दी है कि नमक को हमेशा बंद डिब्बों में ही रखना चाहिए। नमक को नमी से बचाना चाहिए व आग के पास नहीं रखना चाहिए। नमक को कभी भी गीले हाथों से नहीं छूना चाहिए तथा मिट्टी के बर्तन में नही रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि जिले के समस्त विकासखण्डों में राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस का आयोजन किया जाएगा तथा 27 अक्टूबर तक यह अभियान चलेगा।

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