अच्छी पहल-अब वनांचल की महिलाएं बनाएगी सीताफल से आइसक्रीम, बेल और अंबाडी से शर्बत, रेड राइस चीला, कोदो से इडली, कृषि विभाग दे रहा इन्हें प्रशिक्षण



बालोद। जिले के वनांचल की महिलाएं और किसान अब सीताफल से आइसक्रीम, बेल व अंबाडी से शरबत, रेड राइस से चीला तो कोदो से इडली बनाना भी सीख रही है। इसके लिए शासन प्रशासन द्वारा कृषि विभाग के जरिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। अब स्थानीय प्राकृतिक उत्पादों के जरिए नए-नए चीजों का निर्माण कर मार्केटिंग के जरिए बालोद जिले के वनांचल के महिला समूह व कृषक समूह भी अब छत्तीसगढ़ में अपनी अलग पहचान बनायेंगे।

इसी क्रम में कलेक्टर जनमेजय महोबे के मार्गदर्शन में नेशनल मिशन आफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन एंड टेक्नोलॉजी (एनएमएईटी) की उपयोजना सबमिशन ऑन एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन(एसएमएई) के अंतर्गत केंद्र प्रवर्तित सपोर्ट टू स्टेट एक्सटेंशन प्रोग्राम्स फॉर एक्सटेंशन रिफॉर्म्स आत्मा योजना एवं जिला खनिज न्यास निधि तथा सुराजी गांव योजना नरवा गरवा घुरवा बाड़ी, गोधन न्याय योजना अंतर्गत स्थानीय जैव विविधता को जन उपयोगी बनाने हेतु खाद्य प्रौद्योगिकी की नवीन श्रृंखला में अंबाडी शरबत, आइसक्रीम, रेड राइस चीला व कोदो से इडली तैयार कर विक्रय करने के विषय में जिले के कृषक अभिरूचि समूहों को गौठान ग्राम कर्रेझर के अंतर्गत ग्राम पेटेचुवा विकासखंड गुरुर में प्रशिक्षण दिया गया। इस विशेष प्रशिक्षण में सौभाग्य महिला कृषक अभिरूचि समूह पेटेचुवा (मरकाटोला), महिला कृषक अभिरूचि समूह झलमला, विकासखंड बालोद द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया गया।

कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति देते हुए मुख्य अतिथि सभापति कृषि स्थाई समिति व जिला पंचायत सदस्य ललिता पिमन साहू ने कहा कि कृषि विभाग में अनेक योजनाएं संचालित है। जिसमें कृषकों के पास उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग कर अधिक आय अर्जन करने की विधाएं सिखाती है। महिला सशक्तिकरण की दिशा प्रशस्त करती है। सीताफल से आइसक्रीम, अंबाडी व बेल से शरबत का उपयोग करके रसायन युक्त कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक के उपयोग को कम करने की आवश्यकता है। स्थानीय रूप से उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके विशेषकर कृषि वानिकी, जैविक उत्पादों के उपार्जन, प्रसंस्करण, मूल्य प्रवर्धन एवं विपणन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। अपने खेती-बाड़ी, वन में उपलब्ध फलों के उपयोग से महिला कृषकों को कृषि के कार्य के साथ इस प्रकार की गतिविधियों से आर्थिक सामाजिक उत्थान करना चाहिए। नागेश्वर लाल पांडे, प्रोजेक्ट डायरेक्टर आत्मा व उप संचालक कृषि ने किसानों को प्रशिक्षित करते हुए कहा कि एक्सटेंशन रिफॉर्म्स आत्मा योजना में कृषि उद्यानिकी, पशुपालन, कृषि वानिकी के उत्पादन का का प्रसंस्करण, मूल्य प्रवर्धन, विपणन की श्रृंखला में बेल एवं अंबाडी का शरबत, सीताफल की आइसक्रीम, रेड राइस चीला, कोदो से इडली तैयार करने के प्रशिक्षण से क्षेत्र के कृषकों एवं उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।


रायपुर से विजयनगरम राष्ट्रीय राज्य मार्ग क्रमांक 30 में शहरी आर्थिक रूप से संपन्न उपभोक्ताओं को उपरोक्त पौष्टिक जैविक खाद्य व्यंजन विक्रय कर अधिक आमदनी दिलाने हेतु यह रणनीति तैयार की गई है। उन्होंने क्षेत्र में उपलब्ध अब तक के जैव विविधता में अब तक जिन फसलों का लाभ नहीं मिल पाया है, उनके पोषक मूल्य, औषधिय उपयोग एवं प्रसंस्कृत उत्पादकों की राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विपणन की संभावनाओं की भी जानकारी दी तो इसके अलावा सीताफल अन्य फलों के पाए जाने वाले पौष्टिक चीजों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बेल अत्यंत गुणकारी औषधि फल है जिसमें कैल्शियम मैग्नीशियम पोटेशियम विटामिन व अन्य चीजें पाई जाती है। इसके कई स्वास्थ्यवर्धक भी फायदे हैं। आत्मा योजना में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत दूलोरिन पटेल व मोहन पटेल, मां दुर्गा कृषक अभिरूचि समूह जोराताल, जिला कबीरधाम के द्वारा किसानों को बेल एवं अंबाडी का शरबत, सीताफल की आइसक्रीम की विधि की सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक जानकारी दी गई।
वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी गुरुर जेएस खेगर ने महिला कृषकों को कृषि के क्षेत्र में योजनाओं का लाभ लेकर सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्राम सनौद के प्रगतिशील किसान ध्रुव राम साहू ने जैविक खाद, कीट नियंत्रण की जानकारी दी।
इस दौरान पीमन साहू, नौशाद कुरैशी, नरेंद्र सिन्हा ग्राम पंचायत सरपंच कर्रेझर, नरोत्तम ध्रुव उपसरपंच, पीके देवांगन कृषि विस्तार अधिकारी, ठाकुर ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी शाश्वत ठाकुर, भेदु प्रसाद साहू, मुकेश कुमार साहू, शिव यादव, खुमान साहू ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी व स्टाफ मौजूद थे।

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