डौंडीलोहारा/बालोद। समीपस्थ ग्राम बड़गांव स्थित श्री सिद्धपीठ दक्षिणमुखी हनुमानजी मंदिर में आयोजित भव्य नवरात्रि महोत्सव इन दिनों आस्था और भक्ति का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रतिदिन छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
पंडवानी प्रस्तुति ने बांधा समां
22 मार्च को पद्मश्री उषा बारले (भिलाई) ने अपनी शानदार पंडवानी प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने महाभारत के प्रसंगों में द्यूत क्रीड़ा और द्रौपदी चीरहरण जैसे अत्यंत भावुक प्रसंगों को अपनी अनूठी शैली में प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि कैसे शकुनि की कूटनीति से युधिष्ठिर ने अपना राज्य और द्रौपदी तक को दांव पर हार दिया, जिसके बाद कौरवों द्वारा चीरहरण का प्रयास किया गया। इस दौरान द्रौपदी द्वारा श्रीकृष्ण का स्मरण करने पर भगवान ने उनकी लाज बचाई, जिसे सुनकर पूरा वातावरण भाव-विभोर हो उठा।
पंडवानी: छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा
समिति के कोषाध्यक्ष नेमसिंह साहू ने बताया कि पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकगायन शैली है, जिसमें महाभारत की कथाओं को संगीत और एकल अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस कला को झाडूराम देवांगन, तीजन बाई, ऋतु वर्मा जैसे कलाकारों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। पंडवानी की दो प्रमुख शैलियां कापालिक और वेदमती हैं, जो इसकी विशेषता को दर्शाती हैं।
मंदिर निर्माण के लिए सहयोग की अपील
मंदिर संचालक युगल किशोर साहू ने बताया कि हनुमानजी के नवीन मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके लिए उन्होंने दानदाताओं और श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है, ताकि यह धार्मिक स्थल और भव्य रूप ले सके।
आज होगी पटपर की भव्य जस झांकी
उन्होंने जानकारी दी कि 23 मार्च को छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध ‘पटपर की जस झांकी’ का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस भव्य धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनें।
आभार और उत्साह का माहौल
समिति के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने कार्यक्रम में उमड़ रही भारी भीड़ और श्रद्धालुओं के उत्साह के लिए आभार व्यक्त किया। नवरात्रि महोत्सव के चलते पूरे क्षेत्र में भक्ति, संस्कृति और उत्साह का माहौल बना हुआ है।
निष्कर्ष
बड़गांव में चल रहा नवरात्रि महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना है, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिल रहा है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है।
