NH-930 पर बड़ा हादसा तय? खतरनाक टर्निंग बना ‘मौत का कुंड’, न रेलिंग न लाइट — प्रशासन पर उठे सवाल



बालोद। राष्ट्रीय राजमार्ग-930 पर बालोद–दल्ली राजहरा मार्ग स्थित वार्ड क्रमांक 15 में संस्कारशाला स्कूल के पास खरखरा नहर किनारे बना चार-टर्निंग मोड़ इन दिनों गंभीर खतरे का केंद्र बन गया है। आमपारा, सिंचाई कॉलोनी और कुदुरूपरा की ओर जाने वाला यह मोड़ बिना सुरक्षा इंतजाम के ‘मौत का कुंड’ बनता जा रहा है, जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

रात में बन जाता है ‘ब्लाइंड स्पॉट’
जैसे ही अंधेरा होता है, पूरा क्षेत्र घुप्प अंधेरे में डूब जाता है
न स्ट्रीट लाइट, न हाई मास्क लाइट — वाहन चालकों को न तो मोड़ का अंदाजा होता है और न ही नहर का। ऐसे में जरा सी चूक जानलेवा दुर्घटना में बदल सकती है

पैदल राहगीरों के लिए भी खतरा
यह मार्ग आसपास के रहवासियों के लिए दैनिक जीवन का हिस्सा है, लेकिन हालात इतने खराब हैं कि पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है
न फुटपाथ, न सुरक्षा रेलिंग, न चेतावनी संकेत — बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हर दिन जान जोखिम में डालकर यहां से गुजरने को मजबूर हैं

PWD और WRD के बीच तालमेल की कमी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण PWD द्वारा और नहर जल संसाधन विभाग (WRD) के अधीन है, लेकिन दोनों विभागों के बीच समन्वय के अभाव ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया है।
नहर में मलबा जमा है, दीवारें कमजोर हो रही हैं, ऐसे में हल्की बारिश या भारी वाहन गुजरने पर बड़ा हादसा हो सकता है।

अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
इस मार्ग से रोजाना गुजरने वाले जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी इस खतरे को नजरअंदाज कर रहे हैं
स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि — क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?

कानूनी रूप से भी लापरवाही अपराध
जानकारों के अनुसार, IPC की धारा 336 व 337 के तहत ऐसी लापरवाही दंडनीय अपराध की श्रेणी में आती है
इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग के मानकों के अनुसार ऐसे खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा रेलिंग अनिवार्य होती है

उमेश कुमार सेन की चेतावनी
जनहित के मुद्दों को उठाने वाले समाजसेवी उमेश कुमार सेन ने इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा—
“यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जनता की जान से सीधा खिलवाड़ है। बिना रेलिंग का मोड़, अंधेरा और नहर — यह पूरी तरह हादसे को न्योता देने जैसा है। प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे, अन्यथा जनआंदोलन किया जाएगा।”

जनता की प्रमुख मांगें

  • टर्निंग पॉइंट पर तत्काल रेलिंग/बैरिकेड की व्यवस्था
  • हाई मास्क लाइट व स्ट्रीट लाइट लगाई जाए
  • नहर की सफाई और दीवारों का मजबूतीकरण किया जाए
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो

निष्कर्ष
बालोद का यह खतरनाक मोड़ प्रशासन की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, तो यह स्थान किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। अब सवाल यही है—क्या प्रशासन चेतावनी समझेगा या किसी अनहोनी के बाद ही जागेगा?

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