गुरुर/बालोद। महानदी जल प्रदायक नहर शाखा से अत्यधिक जल प्रवाह ने ग्राम पंचायत मुड़गहन के आश्रित ग्राम सालेभाट के किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। देवरानी-जेठानी नाला में जरूरत से ज्यादा पानी छोड़े जाने के कारण करीब 40 से 45 एकड़ फसल पूरी तरह खराब हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
एक महीने से अधिक समय से जारी है पानी का दबाव
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले एक से डेढ़ महीने से लगातार नहर से पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन अब तक जल प्रवाह को नियंत्रित नहीं किया गया है। किसानों का कहना है कि क्षमता से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण खेतों में जलभराव हो गया है, जिससे फसल पूरी तरह चौपट हो गई।
किसानों ने बताई अपनी पीड़ा
किसान बुधराम यादव, रामेश्वर ध्रुव, रूपराम साहू, जीवराखन ध्रुव, जागेश्वर ध्रुव और मोहित मंडावी ने बताया कि नहर में आवश्यकता से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर गया। उन्होंने यह भी बताया कि नाला में तेज जल प्रवाह के चलते तीन पशुओं की भी मौत हो चुकी है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
मेड़ बंधान बहा, खेत बने टापू
किसान रामेश्वर ध्रुव ने बताया कि पिछले वर्ष फसल कटाई के बाद मेड़ बंधान का कार्य कराया गया था, ताकि बारिश में खेत सुरक्षित रहें। लेकिन इस बार अत्यधिक जल प्रवाह के कारण मेड़ बंधान पूरी तरह बह गया, जिससे खेत टापू जैसे बन गए हैं और धीरे-धीरे उपजाऊ मिट्टी का कटाव हो रहा है। इससे भविष्य में खेती करना और भी मुश्किल हो सकता है।
सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप
किसानों ने बताया कि उन्होंने सिंचाई विभाग को कई बार आवेदन देकर जल प्रवाह कम करने की मांग की, लेकिन अब तक न तो पानी कम किया गया और न ही कोई अधिकारी मौके पर निरीक्षण के लिए पहुंचा। इससे किसानों में आक्रोश और निराशा बढ़ती जा रही है।
निस्तार तालाब पर भी मंडरा रहा खतरा
ग्रामीणों ने चिंता जताई कि देवरानी-जेठानी नाला से बहता पानी गांव के निस्तारी तालाब से जुड़ा हुआ है। अधिक जल प्रवाह के कारण तालाब के बंधान में मिट्टी का कटाव शुरू हो गया है, जिससे तालाब के पार बहने की आशंका बढ़ गई है। यदि ऐसा हुआ तो ग्रामीणों को निस्तारी (दैनिक उपयोग) के पानी के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
विभाग का पक्ष भी आया सामने
इस मामले में सिंचाई विभाग के एसडीओ पी.के. खेरडे ने बताया कि महानदी नहर शाखा में रिपेयरिंग कार्य चल रहा है, जिसके चलते देवरानी-जेठानी नाला के माध्यम से रायपुर नगर निगम के लिए पानी छोड़ा जा रहा है।
निष्कर्ष
फसल नुकसान, पशुओं की मौत और जलभराव जैसी समस्याओं से जूझ रहे किसान अब प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। यदि समय रहते जल प्रवाह को नियंत्रित नहीं किया गया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है और किसानों की आजीविका पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
