बालोद। दल्लीराजहरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम जबकोहड़ा में 50 फीट गहरे कुएं में गिरे भालू का सफल रेस्क्यू किया गया। वन विभाग की सूझबूझ, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और ग्रामीणों के सहयोग से यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा।
दलदली कुएं में फंसा था भालू
जानकारी के अनुसार, जिस कुएं में भालू गिरा था वह करीब 50 फीट गहरा था और पूरी तरह सूखा नहीं बल्कि नीचे हल्का दलदली था। ऐसे में भालू खुद बाहर निकलने में असमर्थ था और लंबे समय तक वहीं फंसा रहा।
भालू की फितरत बनी ‘राहत का रास्ता’
वन विभाग ने भालू के स्वभाव को समझते हुए सीढ़ी डालने की रणनीति अपनाई।
भालू पेड़ों पर आसानी से चढ़ने में सक्षम होते हैं, इसी फितरत का उपयोग करते हुए टीम ने करीब 50 फीट लंबी सीढ़ी कुएं में उतारी।
खुद ही चढ़कर बाहर आया भालू
सीढ़ी देखते ही भालू ने उसे सहारा बनाया और धीरे-धीरे ऊपर चढ़ते हुए कुएं से बाहर निकल आया। बाहर निकलते ही वह सीधे जंगल की ओर चला गया। इस दृश्य को देखकर मौके पर मौजूद सभी लोगों ने राहत की सांस ली।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में चला ऑपरेशन
वनमंडलाधिकारी अभिषेक अग्रवाल के निर्देशन में यह पूरा रेस्क्यू अभियान चलाया गया। उन्होंने बताया कि
“जंगल सफारी के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में यह ऑपरेशन किया गया। ऐसी घटनाओं में प्रशिक्षित टीम की जरूरत होती है और सभी के सामूहिक प्रयास से यह संभव हो पाया।”
टीमवर्क से मिली बड़ी सफलता
इस रेस्क्यू में उपवनमंडलाधिकारी दल्लीराजहरा, वन परिक्षेत्र अधिकारी, उड़नदस्ता दल, वन विभाग के कर्मचारी, वन प्रबंधन समिति जबकोहड़ा और ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वन्यजीव संरक्षण का संदेश
यह घटना एक बड़ा संदेश देती है कि—
👉 वन्यजीवों के व्यवहार को समझकर ही सफल रेस्क्यू संभव है
👉 खुले कुओं को सुरक्षित करना बेहद जरूरी है
👉 समय पर सूचना और सामूहिक प्रयास से किसी भी बड़ी घटना को टाला जा सकता है
बालोद जिले में हुआ यह रेस्क्यू ऑपरेशन वन विभाग की तत्परता, समझदारी और संवेदनशीलता का बेहतरीन उदाहरण बन गया है।
