त्याग, सेवा और करुणा से होती है रामराज्य की स्थापना : जगदीश देशमुख



कांकेर/बालोद। विगत 19 जनवरी को कांकेर के पुसवाड़ा में आयोजित त्रिदिवसीय भव्य मानस महोत्सव में श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश देशमुख ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता करते हुए रामराज्य की सच्ची अवधारणा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि रामराज्य मंच से नारे लगाने से नहीं, बल्कि राजसत्ता के वैभव और भोगों के त्याग से स्थापित होता है। श्री देशमुख ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने राजसत्ता के वैभव और अनंत भोगों का त्याग कर दलित, शोषित, पीड़ित और वंचित समाज के उत्थान के लिए चौदह वर्षों तक वनवास का जीवन व्यतीत किया। उन्होंने श्रीराम के जीवन मूल्यों को जनकल्याण और सेवा का सर्वोच्च उदाहरण बताया। महाभारत और रामायण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता की अंधी दौड़ ने महाभारत जैसे विनाशकारी युद्ध को जन्म दिया, जबकि श्रीराम ने त्याग के मार्ग पर चलकर रामराज्य की स्थापना की। मानस सभा को संबोधित करते हुए श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान के महासचिव राजेंद्र ठाकुर ने दंडकारण्य की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम के वनगमन का सर्वाधिक समय छत्तीसगढ़ की पावन भूमि में व्यतीत हुआ। श्रीराम और भगवान शिव के अनन्य प्रेम को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि श्रीराम ने दो स्थानों पर स्वयं शिवलिंग की स्थापना की—एक बारसूर स्थित चित्तपिटी माता मंदिर में तथा दूसरा सेतुबंध रामेश्वरम में। श्री ठाकुर ने बताया कि दंडकारण्य क्षेत्र में स्थित रक्सा हाड़ा पर्वत वह स्थान है, जहां रावण के अत्याचार से मारे गए ऋषि-मुनियों की अस्थियों को देखकर श्रीराम ने आतंक और अधर्म के समूल नाश का संकल्प लिया था। इस भव्य आयोजन के दौरान एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल के अंतर्गत खम्मन सिंह नेताम एवं जैन बाई नेताम परिवार की हिंदू धर्म में घर वापसी कराई गई, जिसे श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान की उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान छत्तीसगढ़ के कोषाध्यक्ष छगन यदु, उपाध्यक्ष हृदय राम सोरी, रामबिलास, दादरा, सरपंच सावित्री कोर्राम, शेषनारायण गंजीर, शेखर साहू, छबीलाल नाग, रामचरण कोर्राम, मधुसूदन पटेल, बिसनलाल पटेल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमीजन उपस्थित रहे।

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