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कृष्ण जन्मोत्सव की कथा प्रसंग के साथ भक्ति से सराबोर हुए ग्रामीण

गुरुर । ग्राम ठेकवाडीह में चल रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन प्रवचनकर्ता पंडित बल्ला प्रसाद शर्मा ने बताया कि व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए, अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। कलयुग में भागवत की कथा सुनने मात्र से हर प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथावाचक ने कहा कि भागवत कथा एक ऐसी कथा है जिसे ग्रहण करने मात्र से ही मन को शांति मिलती है। भागवत कथा सुनने से अहंकार का नाश होता है। कथा वाचक ने कृष्ण जन्मोत्सव की कथा बताते हुए कहा कि चारों ओर अत्याचार, अनाचार का साम्राज्य फैल गया था, अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को देवकी के आठवें संतान के रूप में अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। लेकिन भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। शर्मा जी ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा। भागवत कथा में प्रतिदिन दोपहर को भंडारा प्रसाद दिया जा रहा है जहां ग्रामीण सहित दुर दराज से पहुंचे श्रद्धालु भंडारा में प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। भागवत कथा सुबह 10 बजे से 1 तक एवं दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक किया जा रहा है। कथा में गुरुवार को श्री कृष्ण बाल लीला की कथा बताई जाएगी। भागवत कथा का रसपान करने आसपास ग्रामीण दुपचेरा , बोहारडीह,कोलिहामार सहित श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

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