खबर का असर- सांकरा ज में विवादित सखी समूह ने विभागीय जांच से पहले ही स्वेच्छा से छोड़ा काम, नई सिद्धि समूह ने उठाई मध्यान्ह भोजन की जिम्मेदारी



विभागीय जांच से पहले ही पुरानी समूह हट गई पीछे, उठ रहे कई सवाल , इधर लॉटरी सिस्टम से नए समूह का हुआ चयन

बालोद। बालोद ब्लॉक के सांकरा ज के प्राइमरी, मिडिल स्कूल और सुंदरा के प्राइमरी स्कूल में मध्यान्ह भोजन संचालित करने वाली सखी महिला स्व सहायता समूह के द्वारा बरती जा रही अनियमितता को हमने बीते दिनों उजागर करते हुए खबर प्रकाशित किया था। जिसमें बताया गया था कि समूह की आड़ में अध्यक्ष के पति द्वारा मनमानी की जाती है। इस खबर के बाद बीते दिनों शाला प्रबंधन समिति की बैठक बुलाई गई। जिसमें समूह के जिम्मेदार लोगों को भी बुलाया गया और उन्हें कहा गया कि आप लोगों के द्वारा कई तरह की अनियमितता की जा रही है। जिसके चलते हम शिक्षकों का ध्यान पढ़ाई करवाने के बजाय मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था बनाने में लगा रहता है। ऐसे में हम दूसरा विकल्प तलाश रहे हैं।

मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक डीआर ठाकुर सहित संकुल समन्वयक बंधु राम ठाकुर, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरी देशमुख, दोनों पंचायत के सरपंचों और अन्य शिक्षकों और पालकों की मौजूदगी में यह बैठक हुई। बढ़ते विवाद और आरोपों से घिरे सखी स्व सहायता समूह की अध्यक्ष पद्मिनी देशमुख ने स्वेच्छा से काम छोड़ने का निर्णय लिया।

उनके द्वारा लिखित में काम छोड़ने की सूचना स्कूल प्रबंधन को दी गई। जिसके बाद गांव में दूसरे दिन मुनादी करवा कर नए इच्छुक स्व सहायता समूह को मध्यान्ह भोजन संचालन करने के लिए आवेदन आमंत्रित किया गया।

दो दिनों तक चली इस प्रक्रिया के बाद दो समूह जगन्नाथपुर से दुर्गा स्व सहायता समूह और सांकरा ज से सिद्धि स्व सहायता समूह द्वारा इच्छा जाहिर करते हुए आवेदन दिया गया था। इस हेतु 5 दिसंबर को पुनः समूह चयन के लिए बैठक बुलाई गई। जिसमें पहले तो आम सहमति से निर्णय लेने का प्रयास किया गया। सांकरा के समूह की अध्यक्ष नूतन बघेल और अन्य महिलाओं का कहना था कि कई सालों तक जगन्नाथपुर के समूह द्वारा मध्यान्ह भोजन चलाया जा चुका है तो अब सांकरा के समूह को मौका दिया जाए। तो वही जगन्नाथपुर से अन्य समूह द्वारा जो आवेदन दिया गया था उनके द्वारा इस बात का विरोध किया गया।

आम सहमति नहीं बनने की स्थिति में फिर लॉटरी सिस्टम से चयन किया गया। जिसमें सांकरा की सिद्धि स्व सहायता समूह को ही योजना संचालन की जिम्मेदारी मिल गई और अब उनके द्वारा सोमवार से व्यवस्थित तरीके से योजना का काम संभाला जाएगा। इधर पुराने समूह के द्वारा बरती जा रही लापरवाही और मीडिया में मामला उजागर होने के बाद समूह की एक समर्थक रसोईया द्वारा बैठक के दौरान वाद विवाद करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास भी किया गया। जिसको ध्यान में रखते हुए शाला प्रबंधन समिति व नई समूह ने निर्णय लिया है कि अगर आने वाले दिनों में भी उक्त विवादित रसोईया के व्यवहार में सुधार नहीं आया और अनियमितता दूर नहीं हुई तो उसे भी हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।

विभागीय जांच शुरू होने से पहले ही काम छोड़ना कितना सही !

इधर मीडिया में मामला उजागर होने के दूसरे दिन ही विवादित समूह के लोगों द्वारा स्वेच्छा से काम छोड़ने की बात कहते हुए लिखित में दे दिया गया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के संबंध में अभी प्रशासन की ओर से जांच शेष है और इधर संबंधित समूह के लोगों ने काम ही छोड़ दिया है। ऐसे में यह कितना सही है! इस बात की चर्चा गांव में है। लोगों का कहना है कि अगर मीडिया में जो खबरें आई है वह गलत है या समूह द्वारा सही काम किया जा रहा है तो उन्हें काम छोड़ने की क्या जरूरत थीं हालांकि समूह के लोग शासन से समय पर पैसा नहीं मिलने का हवाला देते रहे। पर जो समूह 8-10 साल से यह योजना चला रही है वह बीते दो-तीन महीने का अगर भुगतान नहीं भी हुआ तो इस बात पर काम छोड़ दे यह बात हजम नहीं होती। सच्चाई जांच के बाद सामने आनी थी कि उनके द्वारा लापरवाही की जाती है या नहीं? पर जांच शुरू होने से पहले ही समूह ने योजना से हाथ खींच लिया।

मीडिया कर्मी को देते रहे तरह-तरह की धमकियां , अध्यक्ष और रसोईया लगाने लगी रोजी-रोटी छीनने का आरोप

मामले को उजागर करने वाले एक मीडिया कर्मी को बैठक के दौरान पूर्व समूह की अध्यक्ष पद्मिनी देशमुख और एक महिला रसोईया द्वारा तरह-तरह की धमकियां और अपशब्द कहे जा रहे थे। जिसके ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड भी सामने आए है। विवाद करने वाली महिलाओं द्वारा आरोप लगाया जा रहा थे कि हमारी रोजी-रोटी छिन दिए हो। इस पर मीडिया कर्मी का कहना था कि जब आप लोगों ने खुद से काम छोड़ा है तो इसमें मेरा किसी का रोजी रोटी छीनने का सवाल ही नहीं उठता। अगर आप लोग सही हैं तो आगे भी कार्य करते रहिए। जबकि समूह की आड़ में व्यक्ति विशेष द्वारा ही लाभ कमाया जा रहा था। समूह के अन्य महिलाओं को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत क्या-क्या काम होता है, इसकी उन्हें जानकारी तक नहीं है। ना उन्हें किसी नोटिस का पता होता था, ना किसी बैठक का। ना आय और व्यय का। नाम समूह का होता था और काम सिर्फ एक ही व्यक्ति करते थे। समूह की महिलाएं अन्य गतिविधियों में जुड़कर आय अर्जन कर रही हैं। समूह के नाम पर किराना व्यवसायी रामा देशमुख और उनकी पत्नी पद्मिनी ही योजना का संचालन और प्रबंधन कर रहे थे।

क्या कहा प्रधान पाठक ने

मिडिल स्कूल सांकरा ज के प्रधान पाठक डीआर ठाकुर ने कहा कि बीते दिनों मिडिया में मामला उजागर होने और बढ़ते विवाद को देखते हुए बैठक बुलाई गई थी। जिसमें स्वेच्छा से पुराने समूह द्वारा लिखित में सूचना देकर काम छोड़ दिया गया है। पुराने समूह की कई शिकायतें भी थी जिससे हमने विभाग को समय-समय पर अवगत कराया था।5 दिसंबर को हमने नए समूह चयन हेतु बैठक बुलाई थी। जिसमें लॉटरी सिस्टम से सिद्धि स्व सहायता समूह सांकरा ज को मध्यान्ह भोजन संचालन का जिम्मा मिला है। जो सोमवार से व्यवस्थित तरीके से अपना काम संभालेंगे। वही बीते दिनों की बैठक के दौरान माहौल बिगाड़ने का प्रयास करने वाली एक रसोइया को भी समझाया गया कि वह अपना रवैया सुधारे । पहले भी उनकी कुछ शिकायतें आई हैं। अगर उनके द्वारा नई समूह , शाला प्रबंधन समिति और हमारे यानि शासन के दिशा निर्देश के अनुसार कार्य नहीं किया जाता है तो आगामी कार्रवाई की जा सकती है। वर्तमान में सांकरा मिडिल में 87, प्राइमरी में 75 और सुंदरा प्राइमरी स्कूल में 23 बच्चे हैं। नई समूह को तीनों स्कूल के मध्यान्ह भोजन योजना का काम देखना है।

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