एक परंपरा ऐसी भी: लिंगो बाबा को अर्पित करते हैं शराब,आदिवासी के देवताओं को मानते हैं यहां पूरा गांव



चिचबोड़ में चली आ रही है पोला के दूसरे दिन विशेष पूजन की परंपरा

रीति रिवाज के साथ गांव की सुख समृद्धि के लिए होती है पूजा, बंद रखते हैं सभी कामकाज

कंटेंट- दीपक यादव/ तस्वीरें-संतोष साहू (डीबी डिजिटल मीडिया बालोद/गुण्डरदेही)। गुण्डरदेही ब्लॉक के ग्राम पंचायत चिचबोड़ एक ऐसा गांव है, जहां सभी ग्रामीण आदिवासी के देवी देवताओं को मानते हैं। भले ही यहां आदिवासी सहित अन्य समाज और समुदाय के लोग निवासरत हैं पर आदिवासी के देवी देवताओं में शामिल लिंगो देवता और गढ़िया बाबा यहां के सभी ग्रामीणों के लिए पूजनीय है। इसी क्रम में पूर्वजों से यहां एक विशेष परंपरा चली आ रही है, जिसके तहत पोला तिहार के दूसरे दिन गांव में सीमा पर स्थापित लिंगो देव और गढ़िया बाबा की सामूहिक पूजा अर्चना ग्रामीणों द्वारा की जाती है। रविवार को यह विशेष आयोजन हुआ। जिसके तहत गांव वासियों ने अपने सभी कामकाज खेती किसानी आदि बंद रखकर त्यौहार मनाया और सभी गढ़िया बाबा और लिंगो देव के समक्ष पहुंचे और वहां विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। यह पूजा अर्चना गांव की सुख समृद्धि की कामना और समस्याओं के दैविक समाधान के उद्देश्य से की जाती है ताकि गांव में किसी तरह की कोई बाधा या विपत्ति ना आए, गांव की खुशहाली बरकरार रहे। अब इसे अंधविश्वास कहे या आस्था लेकिन आज भी यह परंपरा 2025 के आधुनिक दौर में भी कायम है।

खुशी से चढ़ाते हैं देसी शराब भी

यहां के ग्रामीणों में राजकुमार, सुरेश गेंड्रे, रोहित देवांगन, सरपंच भागवत साहू, रामदेव साहू आदि ने बताया कि यह परंपरा अभी से नहीं हमारे पूर्वजों से चली आ रही है। कब से यह शुरू हुआ इसके बारे में तो हम कुछ कह नहीं सकते लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी इस परंपरा को सभी निभा रहे हैं और आने वाली पीढ़ी भी गांव में लिंगो बाबा और गढ़िया देव के पूजने की प्रथा को जारी रखने की बात कहते हैं। इस आयोजन में सिर्फ आदिवासी नहीं बल्कि सभी समाज के लोग मिलकर हिस्सा लेते हैं।

रविवार को गांव के ही बिरसा मुंडा ग्रुप के युवतियों द्वारा आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति करते हुए गली भ्रमण किया गया और पूजा स्थल पर जाकर सभी ने सामूहिक पूजा अर्चना की। खास बात यह है कि इस पूजन के दौरान ग्रामीणों द्वारा अपनी आस्था स्वरूप जय लिंगों डोकरा बाबा को देसी महुआ और देसी शराब तक भी चढ़ाया गया था। यह प्रथा हालांकि आदिवासी देवी देवताओं के पूजन के दौरान देखने को मिलता ही है। अपनी अपनी आस्था के अनुरूप लोग देवी देवताओं को शराब अर्पित करते हैं।

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