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हस्ताक्षर साहित्य समिति ने मनाया संक्रांति पर्व और नव वर्ष मिलन समारोह

दल्लीराजहरा। दल्लीराजहरा निषाद समाज भवन में हस्ताक्षर साहित्य समिति द्वारा मकर संक्रांति पर्व तथा नव वर्ष मिलन समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष संतोष कुमार ठाकुर ‘ सरल ‘ ने किया। मुख्य अतिथि आचार्य जे आर महिलांगे तथा विशेष अतिथि डॉक्टर श्रीमती शिरोमणि माथुर, शमीम अहमद सिद्दीकी तथा घनश्याम पारकर थे। काव्य गोष्ठी का संचालन करते हुए वीर रस के कवि आनंद बोरकर ने कहा मकर संक्रांति ‘ सूर्य देवता’ का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है, जो प्रकाश और सकारात्मक का प्रतीक है। साथ ही नए साल की नई उम्मीद भरा कविता से सबके लिए सुख समृद्धि की कामना इस प्रकार की

नए साल की नई सुबह लेकर आएगी सौगात ,धन-धन और सुख समृद्धि की होगी अब बरसात।


इस अवसर पर मुख्य अतिथि आचार्य जे आर महिलांगेे मकर संक्रांति की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व बताते हुए कहा कि जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है तभी जाकर मकर संक्रांति मनाई जाती है जिसके बाद दिन की अवधि रात की तुलना में लंबी हो जाती है साथ ही नए वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए सुंदर रचना प्रस्तुत किया जो इस प्रकार है


ज्ञानी को गर्व नहीं होता है, ज्ञान के गहरा होने पर धीर गंभीर होता है


तत्पश्चात वरिष्ठ लेखिका श्रीमती शिरोमणि माथुर ने कहा कि लोग नई और अच्छी फसल के लिए संक्रांति का पर्व मनाते हैं साथ ही लोग अपने पापों को धोने के लिए गंगा नदी के पवित्र जल में स्नान करते हैं ।महिलाएं अपने पति के लंबी उम्र के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं और गुड़ तिल से बनी मिठाई खाते हैं। उन्होंने अपनी कविता में नए साल का स्वागत करते हुए कहा


चलने दो जीवन की नैया अभी काम कुछ बाकी है, कृष्ण सुदामा के भावों को अभी जगाना बाकी है


साहित्यकार शमीम अहमद सिद्दीकी ने कहा कि मकर संक्रांति के दौरान सबसे लोकप्रिय गतिविधियों में से एक है दोस्तों और परिवार के साथ पतंग उड़ाना हर जगह रंग बिरंगी पतंग से चमकीला आकाश सुंदर दिखाई देता है गोष्ठी की रंग जमाते हुए उन्होंने अपनी कविता से सबके दिल को छू लिया उनका रचना इस प्रकार है
मेरी गीत मेरा चांद हो, सांसों में समाई हुई मधुर सुगंध हो
समिति के अध्यक्ष संतोष कुमार ‘ सरल’ ने अपने कविता में शब्दों के कंगन, दुआओं का धागा, खुशियों का तिलक तथा सफलता का साया के साथ शानदार प्रस्तुति से सब का मन मोह लिया उनकी रचना इस प्रकार है


महाकाल के दर पर चमत्कार हुआ है, हुई देर लेकिन यह बड़ा उपकार हुआ है
हास्य रस के कवि घनश्याम पारकर ने लोगो के जीवन को खुशियाँ से भर देने वाले त्यौहार, राज्य की समृद्ध परंपरा और संस्कृति को दर्शाने वाले पर्व मड़ई – मेला त्योहार पर काव्य पाठ कर सभी को लोटपोट कर दिया। उनकी रचना इस प्रकार है


तोर घर सगा, मोर घर सागा, घर-घर झमेला, मोर गाँव मा आज होवत हे मड़ई मेला


युवा साहित्यकार तामसिंह पारकर ने अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के अवसर को राष्ट्रीय गौरव के पुनर्जागरण का प्रतीक बताते हुए सुंदर दोहा प्रस्तुत किया, जिसमें आज अयोध्या अर्थात जहां युद्ध ना हो या संघर्ष से मुक्त स्थान के पुनर्निर्माण की आवश्यकता को हम सभी का धर्म बताया जो इस प्रकार है


धरती से आकाश तक गूंजे राघव नाम ,राम लाल तो आ रहे पुण्य अयोध्या धाम


अंत में उभरते कलाकार मनोज पाटिल ने भारत को सोने की चिड़िया बनाने हेतु उम्दा रचना प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी उनकी रचना इस प्रकार है सुविचारों को वाहनों के पीछे लिखा देखा है, सावन के झूलों को स्टेटस में देखा है।

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