देवउठनी विशेष: क्षीरसागर सा नजारा दिखता है इस ग्राम के विष्णु धाम में,मनोकामना लेकर आते हैं दूर-दूर से लोग



फरवरी, मार्च में 11 दिनों के यज्ञ का भी हो रहा है 62 साल से आयोजन, लगता है प्रसिद्ध मेला

माधुरी यादव,बालोद। बालोद व दुर्ग जिले की सीमा पर बसा एक गांव है ओटेबंद। जो वो बालोद जिले में गुंडरदेही ब्लॉक में आता है। इस गांव के मंदिरों की अपनी विशेष पहचान है। जहां के विष्णुधाम में फागुन माह में होली के पहले 11 दिवसीय यज्ञ व मेला का आयोजन होता है। इस जगह पर एक ऐसी मूर्तियों की श्रृंखला है, जो देव उठनी पर केंद्रित है। तो
उसकी बनावट ही उसकी खास पहचान बताती है। बालोद जिले में यह एकलौता वृहद आकार का मंदिर है। जहां पर भगवान विष्णु शयन और लक्ष्मी के पैर दबाते क्षिर सागर में आराम की मुद्रा को दिखाया गया है। अब तक लोग तस्वीरों में ही इस तरह के दृश्य देखते रहते हैं या धार्मिक सीरियल या फिल्मों में। लेकिन इस गांव के मंदिर में आप वृहद रूप से एक बड़े भूभाग पर बने मूर्तियों के श्रृंखला को देखकर आश्चर्य रह जाएंगे कि इसकी बनावट बहुत ही सुंदर कलाकृति के साथ की गई है हर कोई जब इस मंदिर में जाता है तो इस क्षिर सागर रुपी मुद्रा को देखने के लिए आतुर होता है और यहां पहुंच कर लोग भगवान विष्णु लक्ष्मी सहित अन्य देवी-देवताओं के दर्शन करते हैं।आज देव उठनी पर भी मंदिर समिति द्वारा इस जगह पर पूजा पाठ किया जाता है। आसपास के गांव के लिए यह देवस्थल प्रमुख माना जाता है। शादी विवाह के समय भी लोग यहां पर पूजा करने के लिए आते हैं। देव उठनी के साथ ही इस जगह का महत्व और बढ़ जाता है। फरवरी या मार्च में फागुन के दौरान जब यहां
यज्ञ व मेला होता है तो दूसरे राज्यों से भी संत महात्मा आकर पूजा-पाठ और यज्ञ में शामिल होते हैं। तो वही लोग भी बड़ी संख्या में यहां जुटते हैं। विष्णु धाम में चारों ओर लगे फव्वारे भी आकर्षण का केंद्र होते हैं। जो इस स्थल की शोभा बढ़ा देता है।
बता दें कि इस मंदिर का निर्माण रायपुर के बंजारी धाम की तर्ज पर किया गया है।

महायज्ञ का आयोजन है विशेष

बताया जाता है कि विष्णुधाम का ये कई साल पुराना मंदिर है। यह मंदिर दुर्ग से बालोद रोड खप्पड़वाड़ा से 3 किमी की दूरी पर है। कदम के पेड़ के नीचे भगवान कृष्ण और राधा की पूजा होती है। संतान प्राप्ति, विवाह, नौकरी, गुम वस्तु की खोज, रोग निराकरण से लेकर अन्य मनोकामना के लिए कदम पेड़ पर लाल कपड़ा और नारियल बांधते है। मंदिर समिति के लोगों ने बताया कि महायज्ञ मंत्रोच्चार के साथ किया जाता है। यज्ञ के माध्यम से विश्व कल्याण की कामना की जाती है।

मंदिर का इतिहास

श्री भू लक्ष्मी नारायण मंदिर ओटेबंद जिला बालोद में यज्ञ प्रारंभ सन 1961 फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष द्वितीया से द्वादस तक चला था। जिसका महत्व अष्ट ग्रही योग से महायज्ञ होने से जन कल्याण के लिये बहुत शुभकारी है। यह यज्ञ प्रति वर्ष 11 दिवसीय होता है । यह यज्ञ विश्व कल्याणर्थ के लिये होता है। पौराणिक विवरण एवं शिलान्यास अनुसार 1994-95 मंदिर निर्माण 20 फ़रवरी 1994 को आचार्य राधेश्याम द्विवेदी के करकमलों द्वारा सम्पन हुआ। श्रद्घालु कदम के पेड़ के फल और पत्ते तोड़ कर अपने घर ले जाते है मनोकामना पूरी होने पर श्रद्घालु मंदिर में जोत भी जलाते है। वर्षों पुराने इस मंदिर में प्रति वर्ष यज्ञ कराया जाता है। विगत 62 वर्षों से परंपरा कायम है। आस्था का मेला लगता है और लाखों श्रद्घालु जुटते है।

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