DAILY BALOD NEWS

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साहू समाज के गौरव बालोद जिले के मूल निवासी “रामेश्वर तेली ” ( पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री) लेंगे राकेश यादव के समर्थन में सभा 6 नवंबर को,,,बालोद ब्लॉक के इन गांवों में होगा आयोजन

बालोद। भाजपा का आमसभा कार्यक्रम में
संजारी बालोद विधानसभा के प्रत्याशी राकेश यादव के समर्थन में साहू समाज के गौरव बालोद जिले के मूल निवासी रामेश्वर तेली ” ( पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री और श्रम रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री) का 6 नवंबर सोमवार को विभिन्न जन सभाओं को संबोधित करेंगे।
इन सभाओं में कृष्णकांत पवार (अध्यक्ष भाजपा जिला बालोद), बालोद क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पदाधिकारी गण सम्मिलित रहेंगे। जन सभा के समय से 1 घंटे पहले समस्त कार्यकर्ता अधिक से अधिक संख्या में अपने बुथ के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के साथ उपस्थिति प्रदान कर सभा को सफल बनाने की अपील की गई है।

ये है कार्यक्रम सारिणी

12:00 बजे – आम सभा करहीभदर, सभा प्रभारी – देवघर साहू , गणेश साहू

1:30 बजे झलमला
सभा प्रभारी – रामेश्वर पटेल, बहूर सिंह नेताम

(अपने पैतृक ग्राम घुमका में 5 मिनट भेंट मुलाकात करेंगे)

2:20 बजे जगन्नाथपुर
सभा प्रभारी अरुण साहू , शिवेंद्र देशमुख

3:00 बजे लाटाबोड सभा प्रभारी हरिश्चंद्र साहू संदीप साहू

जानिए भाजपा के घोषणा पत्र में क्‍या है खास

एक लाख सरकारी नौकरी।
धान का 3100 रुपये समर्थन मूल्‍य।
प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी
भूमिहीन मजदूरों को 10 हजार रुपये हर साल।
महतारी वंदन योजना के तहत हर वर्ष 12 हजार रुपये दिया जाएगा।
गरीब महिलाओं को 500 रुपये में मिलेगा सिलेंडर।
18 लाख घर गरीबों के लिए मकान बनाए जाएंगे।
तेंदूपत्‍ता संग्रहण 5100 रुपये प्रति मानक बोरा।
धान की राशि एकमुश्‍त दी जाएगी।
आयुष्‍मान भारत योजना के तहत 10 लाख इलाज मुफ्त इलाज।
पीएम जन औषधी केंद्र 500 नए केंद्र खोले जाएंगे।
बीपीएल परिवार में बेटी के जन्‍म पर 1.50 लाख रुपये।भर्ती घोटलों का जांच करेंगे।

युवाओं नया उद्योग स्‍थापित करेंगे उन्‍हें 50 प्रतिशत सब्सिडी के साथ ब्‍याज मुक्‍त राशि दी जाएगी।
तेंदूपत्‍ता संग्रहकों के लिए चरण पादुका फिर से दिया जाएगा।
पीएससी की परीक्षाओं में परदर्शिता लाया जाएगा।
हर घर निर्मल जल योजना के तहत जल पहुंचाया जाएगा।
एम्‍स के तर्ज पर सिम्‍स की स्‍थापना हर संभाग में की जाएगी।
इंजीनियरिंग कॉलेज भी खोले जाएंगे।
कॉलेज आनेजान के लिए नगद मासिक भत्‍ता।
राम लला दर्शन योजना के तहत राज्‍य के लोगों को अयोध्‍या दर्शन कराया जाएगा।
इन्‍वेस्‍ट छत्‍तीसगढ़ योजना शुरू की जाएगी। इससे निवेश को प्रोत्‍साहित किया जाएगा।

असम के चाय के बागानों में करते थे काम, सांसद, से लेकर मंत्री तक बन चुके हैं घुमका के रामेश्वर

मूलत: बालोद ब्लॉक के ग्राम घुमका के रहने वाले रामेश्वर तेली असम के डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए । चार साल पहले दूसरी बार वे सांसद बने । इसके पहले दो बार विधायक भी रह चुके। उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रीमंडल में भी शामिल किया । उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा देकर पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस मंत्रालय का जिम्मा दिया है। 52 साल के अविवाहित रामेश्वर तेली कभी खुद चाय बागान में काम करते मजदूरों के लिए संघर्ष करते रहते थे। उनके पूर्वज भी इसी बगान में काम करते थे। रामेश्वर के दादा का जन्म घुमका में हुआ था। करीब 1920 में उनके दादा अन्य सदस्यों संग कमाने खाने के नाम से असम के चाय बागानों में चले गए थे। तब से वे वहीं बस गए। उनके पिता स्व. बुधु तेली थे। रामेश्वर का जन्म असम के दुलियाजान में 14 अगस्त 1970 को हुआ। वे 10वीं तक ही पढ़ पाए और एक उम्र के बाद राजनीति में आ गए। राजनीति और मजदूरों के हित में उनके संघर्ष ने उनकी दुनिया ही बदल दी।कभी कभार आते हैं गांवघुमका में रहने वाले उनके परिजन फगनू राम ने कहा हमारे दादा 10 भाई-बहन थे। जिनमें से 6 भाई घुमका व परना गांव में बस गए। बाकी भाई व बहन 1920 में ही आर्थिक तंगहाली के कारण रोजगार की तलाश में असम के चाय बगान चले गए। उनकी जिंदगी वही चलती बसती रही। रामेश्वर कभी-कभार गांव आता है।समाज के अस्तित्व को बचाने लिखते हैं तेली: रामेश्वर ने कहा उनके दिल में आज भी छग के प्रति प्रेम है। अपनी जाति प्रेम के कारण उन्होंने नाम के बाद साहू की जगह मूल जाति को ही लिखा। इसी नाम ने उन्हें आगे बढ़ाया। तेली समाज को भी दूसरे राज्यों में जीवंत रखने के लिए वे ऐसा करते हैं। युवा अवस्था से ही असम चाय जनजाति छात्र संघ के सक्रिय सदस्य व बाद में जिला अध्यक्ष एवं प्रमुख संगठन सचिव के रूप में कार्य करते हुए अपने राजनीतिक जीवन की शुरूवात किए हैं। 2014 में वे बीजेपी की टिकट से पहली बार सांसद बने थे। असम में छत्तीसगढ़ियों का पलायन 1860 से चाय बागानों के निर्माण के साथ ही आरंभ हुआ। यह वह दौर था जब छत्तीसगढ़ में लगातार अकाल पड़ रहा था।

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