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नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने पर 20 वर्ष का कारावास, गर्भवती होने पर खुला राज

बालोद। किरण कुमार जांगड़े, विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) बालोद (छ.ग.) के द्वारा साकिन- कोटागांव खुरसुगिया पारा, थाना-महामाया, जिला-बालोद (छ.ग.) को भा.द.वि. आरोपी युगेश मेश्राम उर्फ गोलू आप की धारा 376 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा- 6 के आरोप में बीस वर्ष का सश्रम कारावास व कुल 3,000/- रू० अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
प्रकरण का संक्षिप्त विवरण छन्नू लाल साहू, विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) के अनुसार- पीड़िता के पिता के द्वारा दिनांक 17.03.2021 को थाना महामाया में उपस्थित होकर लिखित आवेदन पेश किया कि वह खेती-किसानी एवं ईंटा-भट्ठा में ईट बनाने का काम करता है, वह ईंटा बनाने के लिए ग्राम-बांदे थाना-पंखाजूर, जिला कांकेर में गया था। जब वह दिनांक 01.03.2021 को बांदे से अपने घर आया तो उसकी पत्नी दिनांक 03.03.2021 को बतायी कि उसकी बेटी पीड़िता का मासिक धर्म कुछ महिनों से रूक गया है तब वह और उसकी पत्नी अपनी बेटी से पूछने पर बतायी कि उसके गांव का लड़का युगेश मेश्राम उर्फ गोलू पिछले 01 वर्ष से लगातार शारीरिक संबंध बना रहा है, जिससे वह 06 माह गर्भवती हो गई है। जब यह सुना तब अपनी बेटी पीड़िता को लेकर थाना रिपोर्ट करने जा रहा था तब उसकी बेटी पीडिता बोली कि समाज में हमारी बदनामी होगी, आप लोग अगर थाना में रिपोर्ट करेंगे तो मैं मर जाऊंगी, तब वे दोनों पति-पत्नी अपनी पुत्री पीडिता के मर जाने के डर से और लोकलाज के भय से रिपोर्ट दर्ज नहीं कराये थे। दिनांक 11.03.2021 को लड़का युगेश मेश्राम उसकी बेटी पीडिता को जबरदस्ती अपने घर ले जाकर रखा था तथा पीडिता के साथ शादी का प्रलोभन देकर पिछले 1 साल से लगातार शारीरिक संबंध बनाने से पीड़िता 6 माह की गर्भवती होने के बाद दिनांक 16.03.2021 को अचानक पेट दर्द होने से उपस्वास्थ्य केन्द्र कोटागांव में एक बच्चे (लड़का) को जन्म दी है। दिनांक 17.03.2021 को उपस्वास्थ्य केन्द्र कोटागांव से पता चला कि बाप नाम युगेश मेश्राम पता चलने से वह अपने घर से भाग गया। प्रार्थी के उपरोक्त लिखित रिपोर्ट के आधार पर थाना महामाया में महिला सेल प्रभारी निरीक्षक पदमा जगत के द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किया गया। तत्पश्चात् संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियुक्त के खिलाफ अपराध पाये जाने पर आरोपी के विरूद्ध अभियोग पत्र विचारण न्यायालय में दिनांक 13.04.2021 को प्रस्तुत किया गया। प्रकरण की विवेचना उपनिरीक्षक हरिशंकर साहू द्वारा किया गया। प्रकरण में डी.एन.ए. रिपोर्ट में नवजात शिशु के फीमर बोन का जैविक माता-पिता पीड़िता और आरोपी का होना प्रमाणित पाये जाने के आधार पर आरोपी को उक्त दण्ड से दण्डित किया गया।

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