बालोद । नए संसद भवन में हुए विशेष सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से महिला आरक्षण बिल पास हो गया है। बहुमत से यह बिल पास होने से पूरे देश भर में खुशी का माहौल है। वहीं इस मौके पर भारतीय जनता महिला मोर्चा बालोद की जिला अध्यक्ष दीपा साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के हित में यह बड़ा कदम उठाया है
इससे राजनीति के क्षेत्र में प्रतिनिधित्व करने का ज्यादा से ज्यादा मौका मिलेगा। एक तिहाई महिलाएं सांसद, विधायक चुनी जाएगी। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और देश और राज्य के लिए बनाए जाने वाले कानून और नियमों में उनकी भी अहम भागीदारी होगी।
संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन नई संसद में महिलाओं से जुड़ा ऐतिहासिक बिल पेश किया गया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में मंगलवार को महिला आरक्षण बिल पेश किया। इस विधेयक के कानून में बदलने के बाद सदन में महिलाओं की 33 प्रतिशत अनिवार्यता हो जाएगी।
क्या है महिला आरक्षण बिल में-
इस बिल में लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई है। इसे 128वें संविधान संशोधन विधेयक के तहत पेश किया गया है। इस संशोधन के बाद लोकसभा में एक तिहाई भागीदारी महिलाओं की होगी। इस विधेयक से महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिलने के साथ ही आधी आबादी के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलेगा।
महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारी
भाजपा नेत्री दीपा साहू ने कहा महिला आरक्षण विधेयक में दिल्ली विधानसभा में भी महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने का प्रावधान है। इसके तहत दिल्ली विधानसभा में भी महिलाओं की एक तिहाई भागीदारी अनिवार्य हो जाएगी। इससे राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं को सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ने में गति मिलेगी। इस कानून के बाद लोकसभा में कम से कम 181 महिला सांसद चुनकर आएंगी, फिलहाल सदन में महिला सदस्यों की संख्या 82 है।
सभी विधानसभाओं में भी लागू होगा प्रावधान
लोकसभा और दिल्ली विधानसभा की तर्ज पर ही देश के सभी राज्यों के विधानसभाओं में भी ये बदलाव लागू होगा। जैसे लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित हो जाएंगी। ठीक उसी तरह से सभी राज्यों के विधानसभाओं में महिलाओं की 33 प्रतिशत सीटें अनिवार्य हो जाएगी। इसके तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आवंटित सीटों में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित हो जाएंगी।
आरक्षण का 15 वर्षों तक रहेगा प्रभाव
इस बिल के पास होने के बाद लोकसभा, दिल्ली विधानसभा और सभी राज्यों के विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ जाएगी। महिलाओं के लिए लाए गए आरक्षण 15 वर्षों तक प्रभाव में रहेगा। इसके साथ ही इसमें प्रावधान है कि सीटों का आवंटन रोटेशन प्रणाली के तहत की जाएगी।
