DAILY BALOD NEWS

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विरोधी तत्वों ने की सरस्वती शिशु मंदिर जगन्नाथपुर की छवि खराब करने की कोशिश, प्रधानाचार्य ने कहा देर से मिला था छुट्टी का आदेश, बच्चों को हमने पहले ही दे दी थी छुट्टी, शिक्षकों को पेमेंट के लिए बुलाए थे

बालोद। विगत दिनों बालोद ब्लॉक के ग्राम जगन्नाथपुर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर संस्थान को लेकर खबर सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। जिसमें यहां के प्रधानाचार्य को तानाशाह की संज्ञा देते हुए उन पर कलेक्टर के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाकर पोला पर शिक्षकों को छुट्टी नहीं देने का मामला प्रकाश में आया था। इस मामले की तह तक जाते हुए जब हमने भी छानबीन की तो सच्चाई यह सामने आई कि उक्त स्कूल के बच्चों को पहले से ही पोला को लेकर छुट्टी सुनाई जा चुकी थी। जो कि ऐच्छिक अवकाश के तहत दिया गया था। लेकिन जिला प्रशासन के द्वारा अलग से पोला को लेकर शाम 4 बजे तक की स्थिति में आदेश जारी नहीं हुआ था। जिसके चलते शिक्षकों को छुट्टी को लेकर कोई बात नहीं बताई जा सकी थी। प्रधानाचार्य ताराचंद साहू ने उन पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ विरोधी तत्वों ने उनकी छवि खराब करने की कोशिश की है। यहां सच्चाई सबको पता है कि कैसे हमने अब तक करीब 25 साल लगातार विकास किया है। यहां की शिक्षा स्तर और अनुशासन और संस्कारों की बात जिला और राज्य स्तर तक मानी जाती है। लगातार हमारे विद्यालय के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं ने शिक्षा, खेल और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए जिला, संभाग और राज्य स्तर पर अपना नाम किया है। हाल ही में कबड्डी में राज्य स्तर पर हमारे बच्चों ने विजय श्री हासिल किया। लगातार हमारे विद्यालय के उपलब्धि और शिक्षा के ऊंचे स्तर को कुछ विरोधी तत्व पचा नहीं पा रहे हैं। जिसके चलते हुए भ्रम फैलाकर झूठी शिकायत कर छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रधानाचार्य ताराचंद साहू ने कहा कि पोला को लेकर कलेक्टर द्वारा जारी आदेश हमें व्हाट्सएप पर 5 बजे के बाद प्राप्त हुआ। शाम 4 बजे छुट्टी होने के पूर्व मैंने संकुल समन्वयक को अवकाश को लेकर जानकारी भी ली थी तो उन्होंने कहा था कि उनके पास भी अभी कोई आदेश नहीं आया है। हम लोग सरकारी स्कूल में सुबह स्कूल लगाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने मुझे अपनी व्यवस्था स्वयं देख लेने की बात कही थी। बिना किसी आदेश के हम ठोस निर्णय नहीं ले पाए। इधर कुछ कारणवश शिक्षकों का पेमेंट नहीं हो पाया था। जिसे मैंने पोला के दिन देने के उद्देश्य से उन्हें बुलाया था। बच्चों की तो हमने पहले ही छुट्टी घोषित कर दी थी। शिक्षकों को हमने पेमेंट देकर तत्काल घर जाने दिया। उनसे कोई कार्य नहीं कराया गया। वहीं रही बात शोषणकारी रवैया की, इसको लेकर शाला समिति के द्वारा दूसरे दिन बैठक बुलाकर सभी शिक्षकों को बारी-बारी से व्यक्तिगत तौर से उनसे पूछताछ की गई। उनसे जानकारी ली गई कि उन्हें क्या कोई दिक्कत है, किसी ने यहां किसी तरह के शोषण या दुर्व्यवहार को लेकर बात नहीं कही। सभी यहां की व्यवस्था से संतुष्ट हैं।

सभी आचार्य और दीदी गण मिलकर शाला के उच्चतर विकास के लिए कार्यरत हैं।

घर पर और कोई सदस्य ना होने के चलते बच्चा लेकर शिक्षिका आई थी स्कूल

वही एक शिक्षिका बच्चा लेकर स्कूल पहुंचने की बात को लेकर प्रधानाचार्य ताराचंद साहू सहित संबंधित शिक्षिका शांति साहू ने कहा कि उस दिन घर पर और कोई सदस्य नहीं थे। पेमेंट के लिए थोड़ी देर के लिए स्कूल जाना और आना था इसलिए वह बच्चा गोद में लेकर स्कूल पहुंची थी।

निरीक्षण करने पहुंचे थे संकुल समन्वयक, पाई संतोषजनक स्थिति

शनिवार को स्कूल का सामान्य निरीक्षण करने के लिए संकुल समन्वयक बंधु राम ठाकुर भी विद्यालय आए हुए थे। उन्होंने भी शिक्षकों से पूछताछ की और सभी से समन्वय बनाकर चलने की बात कही। प्रभारी आचार्य ने कहा शासन के जो भी दिशा निर्देश अवकाश आदि की सूचना रहती है उनका हम पालन करते ही हैं। पोला का अवकाश आदेश देर से प्राप्त होने के कारण इस बार ऐसी स्थिति बनी। हालांकि हमने बच्चों को पहले ही छुट्टी बता दिया था। संकुल समन्वयक के समक्ष सभी शिक्षकों ने भी एक स्वर में कहा कि बालोद जिले में भी ऐसे कई स्कूल उस दिन देर से आदेश प्राप्त होने और सूचना के अभाव के चलते खुले हुए थे। लेकिन संस्कृति विरोधी तत्वों के द्वारा हमारे विद्यालय को टारगेट करते हुए बदनाम करने के उद्देश्य से गलत प्रचार किया गया। शिक्षा विभाग से अगर कोई नोटिस या स्पष्टीकरण प्राप्त होता है तो उसका भी जवाब देने के लिए हम तैयार हैं। इस दौरान समिति के सचिव खिलानंद गिलहरा, शिक्षकों में रेख लाल देशमुख, धनंजय साहू, खेमिन साहू, रीना देशलहरे, माधुरी यादव, केसर साहू, लक्ष्मी साहू, भावना सुनहरे, चैन कुमारी नेताम आदि मौजूद रहे।

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