EXCLUSIVE- काम की तलाश में उज्जैन में भटके बच्चे को यशवंत जैन व चाइल्डलाइन की पहल से लौटाया गया सुरक्षित घर, पैसे भी हो गए थे खत्म, 2 दिन से भूखा भटक रहा था यह बच्चा, बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान



बालोद/ मोहला। जिला राजनांदगांव के मोहला ब्लॉक के खडग़ांव में रहने वाला रमेश कुमार साहू अपने गांव के अन्य दोस्तों के साथ बोरवेल गाड़ी में काम करने के नाम से इंदौर व उज्जैन तक चला गया था। जहां वह भटक गया था। उनके दोस्त गांव लौट आए थे लेकिन यह वहीं पर फसा रहा। उसके पैसे भी खत्म हो गए थे ।खाने तक के लाले थे। भूखा प्यासा भटक रहा था। गनीमत उसके पास मोबाइल था तो उसने अपने घरवालों को फोन किया। उनका सगा मामा डोमन साहू बालोद के पाररास वार्ड के पार्षद सरोजिनी साहू के पति है। भांजे ने मामले की जानकारी मामा को दी। इस पर डोमन साहू में हाल ही में बालोद में ही रह रहे बाल अधिकार संरक्षण आयोग के राष्ट्रीय सदस्य यशवंत जैन को इस समस्या के बारे में बताया।

यशवंत जैन,राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग सदस्य

तत्काल उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और फिर चाइल्डलाइन टीम से बात की। राजनांदगांव व बालोद के चाइल्ड लाइन के डायरेक्टर शरद श्रीवास्तव को केस सौंपा गया। फिर चाइल्ड लाइन द्वारा मुंबई कोलकाता फिर उज्जैन के टीम के समन्वय से उज्जैन में भटके हुए रमेश कुमार को ढूंढ निकाला गया।

राष्ट्रीय सदस्य यशवंत जैन ने जीआरपी के अधिकारियों से बात करके पहले तो रमेश को उज्जैन के रेलवे स्टेशन के थाने में ही ठहराया, वहां उनको खाना खिलाया, उनके अकाउंट में पैसे भेज कर उनके आने तक की व्यवस्था उनके द्वारा की गई। इधर चाइल्डलाइन लगातार उज्जैन की टीम से समन्वय बनाकर काम करती रही। जब मदद मांगी गई तो रमेश कुमार की उम्र 17 साल बताई जा रही थी। लेकिन जब कार्यवाही हुई व आधार कार्ड के जरिए जन्म तिथि व अब तक के वर्ष का मिलान किया गया तो कुछ दिन पहले ही वह 18 साल का हो गया था। फिर भी आयोग ने उसे सुरक्षित घर लाने में मदद की। दोपहर 3:00 बजे रमेश चाइल्ड लाइन व बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल से अपने मामा के घर बालोद पहुंचा। उनका एक मामा श्यामसुंदर उन्हें आज रायपुर लेने गया था।

क्या बोले चाइल्ड लाइन के डायरेक्टर
चाइल्डलाइन बालोद के डायरेक्टर शरद श्रीवास्तव ने कहा कि तीन-चार दिन पहले ही मामले की जानकारी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य यशवंत जैन के जरिए मिली। हमने फिर आगे पूरी टीम को इस केस में लगाया और नंबर ट्रेस करके रमेश के बारे में पता लगाया गया कि वह आखिर कहां पर है ।फिर वहां की टीम से मदद मांगी गई। समय रहते हमें मदद मिल गई और दो-तीन दिन की कड़ी मशक्कत के बाद अंततः अब उज्जैन में भटका हुआ रमेश अपने घर आ गया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य यशवंत ने कहा एक भटके हुए बच्चे को उनके घर पहुंचा कर उन्हें भी सुकून मिल रहा है। नवरात्रि जैसे शुभ अवसर पर उनका काम सफल हुआ। इसकी अनुभूति ही अलग है।

इस तरह से भटक गया था बच्चा
जब हमने उज्जैन तक पहुंचने के पीछे की वजह रमेश कुमार साहू से पूछी तो उन्होंने इस बारे में बताया कि वह काम की तलाश में पिछले नौ दस अक्टूबर को गांव के अपने दोस्तों के साथ पाटन गया था। जहां फिर उनके ठेकेदार ने कहा कि बोरवेल गाड़ी में काम करने इंदौर जाना है। उनके कुछ साथी पहले ही इंदौर चले गए। यह और इनका एक साथी बचा हुआ था लेकिन पाटन में काम बन्द होने के कारण ठेकेदार भी पैसे देने से आनाकानी कर रहा था इसलिए वह आगे काम की तलाश में अपने इंदौर पहुंचे दोस्तों के पास चला गया। जहां वह पहुंच नहीं पाया और भटक गया। इंदौर से उज्जैन आ गया। उज्जैन में फिर लगातार तीन दिनों तक भूखा प्यासा घूमता रहा। उसके पैसे भी खत्म हो गए थे। काम की तलाश में इधर उधर भटक रहा था। थक हार कर रमेश ने अपने परिजनों को फोन किया और मदद की गुहार लगाई। तत्काल मामा डोमन साहू ने यह बात राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य यशवंत जैन को बताई और फिर रमेश को सुरक्षित घर लाने का रास्ता निकाला गया।

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