नवरात्रि विशेष: 12 गांवों की रक्षक मां दंतेश्वरी के दरबार में 117 ज्योति कलश प्रज्वलित, जुन्ना पानी बना आस्था का केंद्र



नेमन साहू, डौण्डीलोहारा/बालोद। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर वनांचल क्षेत्र में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। जिले के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम जुन्ना पानी इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और परंपरा का केंद्र बना हुआ है, जहां मां दंतेश्वरी मंदिर में 117 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं। दूर-दराज के ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आ रहा है।

एक किलोमीटर दूर स्थित है प्राचीन मंदिर
ग्राम जुन्ना पानी के पूर्व दिशा में लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर वर्षों पुरानी आस्था का प्रतीक है। यह मंदिर घने वन क्षेत्र के बीच स्थित होने के बावजूद श्रद्धालुओं के विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नवरात्रि के दोनों पर्वों—चैत्र और शारदीय नवरात्र—में यहां विशेष रूप से ज्योति कलश प्रज्वलित करने की परंपरा निभाई जाती है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है।

12 गांवों की रक्षक देवी के रूप में प्रतिष्ठित
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में कुंजाम ठाकुर के पूर्वजों द्वारा मां दंतेश्वरी की स्थापना इस गांव में की गई थी। तभी से मां को केवल जुन्ना पानी ही नहीं, बल्कि आसपास के करीब 12 गांवों की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है। यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान इन सभी गांवों के लोग यहां पहुंचकर ज्योति कलश प्रज्वलित करते हैं और माता से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि मां दंतेश्वरी अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और हर संकट से उन्हें बचाती हैं। आस्था इतनी गहरी है कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दरबार में शीश नवाते हैं।

होली पर्व पर 12 गांवों में भ्रमण की अनोखी परंपरा
मां दंतेश्वरी से जुड़ी एक विशेष परंपरा भी इस क्षेत्र में प्रचलित है। होली पर्व के समय मां दंतेश्वरी 12 गांवों में ‘होली खेलने’ जाती हैं, जिसे धार्मिक यात्रा के रूप में देखा जाता है। इस दौरान गांव-गांव में माता की पूजा-अर्चना होती है और भक्तों को दर्शन का अवसर मिलता है।
यही परंपरा इस बात को और मजबूत करती है कि मां केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक आस्था और एकता का प्रतीक हैं।

117 ज्योति कलश से जगमगाया मंदिर परिसर
इस वर्ष नवरात्रि में 117 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं, जो श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था का प्रतीक है। इन कलशों को न केवल स्थानीय ग्रामीणों द्वारा, बल्कि आसपास और दूरस्थ गांवों से आए भक्तों द्वारा भी प्रज्वलित किया गया है।
रात्रि के समय जब ये सभी ज्योति कलश एक साथ प्रज्वलित होते हैं, तो पूरा मंदिर परिसर दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है, जो एक अद्भुत और आध्यात्मिक दृश्य प्रस्तुत करता है।

पूजा-अर्चना और व्यवस्थाओं में सक्रिय समिति
मंदिर में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी मुख्य पुजारी धनेश कुमार कुंजाम द्वारा निभाई जा रही है। उनके साथ सहयोगी के रूप में माखन कोरामे, मोहन साहू, कनक साहू, लखेंद्र साहू और भोलानाथ कुलदीप सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
वहीं मंदिर संचालन समिति के अध्यक्ष बृजलाल पावरे, कोषाध्यक्ष बिरेंद्र सलामे, सचिव ओम प्रकाश यादव तथा संरक्षक ग्राम पटेल चंद्रशेखर सुखदेव के नेतृत्व में व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की जा रही हैं।

ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह
नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की लगातार भीड़ देखी जा रही है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। कई श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति के लिए ज्योति कलश प्रज्वलित कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग विशेष अनुष्ठान भी करवा रहे हैं।

आस्था, परंपरा और एकता का प्रतीक
ग्राम जुन्ना पानी का यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। यहां 12 गांवों के लोग एक साथ मिलकर नवरात्रि मनाते हैं, जिससे आपसी भाईचारा और सहयोग की भावना मजबूत होती है। नवरात्रि के इस पावन पर्व पर ग्राम जुन्ना पानी में प्रज्वलित 117 ज्योति कलश न केवल आस्था की रोशनी फैला रहे हैं, बल्कि यह संदेश भी दे रहे हैं कि सच्ची श्रद्धा और सामूहिक विश्वास से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मां दंतेश्वरी का यह धाम आज भी हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, विश्वास और संरक्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां हर भक्त को शांति, शक्ति और आशीर्वाद की अनुभूति होती है।

You cannot copy content of this page