बालोद।
भारतीय जनता पार्टी बालोद के जिला महामंत्री सौरभ लुनिया ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ को ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं गृहमंत्री विजय शर्मा का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह कानून प्रदेश में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
कड़े प्रावधानों से अवैध धर्मांतरण पर लगेगी रोक
सौरभ लुनिया ने बताया कि नए कानून में जबरन, प्रलोभन या धोखे से धर्मांतरण करने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
7 से 20 वर्ष तक की सजा तथा सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास और ₹25 लाख तक जुर्माना जैसे प्रावधान इसे और सख्त बनाते हैं।
यह विधेयक वर्ष 1968 के पुराने कानून का स्थान लेगा, जो वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी नहीं रह गया था।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि
“राज्य सरकार जनभावनाओं के अनुरूप निर्णय लेते हुए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता को मजबूत कर रही है।”
यह विधेयक सरकार के दृढ़ नेतृत्व और संवेदनशील शासन का प्रमाण है।
लंबे समय से थी सख्त कानून की जरूरत
सौरभ लुनिया ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रलोभन, दबाव और धोखे के माध्यम से धर्मांतरण के मामले सामने आए, जिससे समाज में असंतुलन की स्थिति बन रही थी।
ऐसे में सख्त और स्पष्ट कानून की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, जिसे अब सरकार ने लागू किया है।
कमजोर वर्गों को मिलेगा संरक्षण
उन्होंने कहा कि इस कानून से
कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को संरक्षण मिलेगा तथा प्रशासन को भी त्वरित और सख्त कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त होगा।
इससे समाज में आपसी विश्वास और भाईचारा और अधिक मजबूत होगा।
‘सबका साथ, सबका विकास’ की दिशा में कदम
अंत में सौरभ लुनिया ने कहा कि भाजपा सरकार हमेशा “सबका साथ, सबका विकास” के संकल्प के साथ कार्य करती आई है और यह विधेयक भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने गृहमंत्री विजय शर्मा सहित पूरी राज्य सरकार का आभार जताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ में सामाजिक संतुलन, सांस्कृतिक मूल्यों और धार्मिक स्वतंत्रता को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
